Friday, July 3, 2026
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होर्मुज संकट टलने के बाद क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने दिया जवाब

होर्मुज संकट टलने के बाद क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने दिया जवाब

​अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) होने के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का संकट टल गया है। इस भू-राजनीतिक सुधार के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होने की उम्मीदें लगाई जा रही हैं।

​हालांकि, तेल की कीमतों में कटौती को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट अगले 2-3 महीनों तक लगातार जारी रहती है, तभी घरेलू स्तर पर कीमतें कम करने पर विचार किया जा सकता है।

​”हम पुराना और महंगा स्टॉक इस्तेमाल कर रहे हैं”

​पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत कम न होने का कारण बताते हुए हरदीप पुरी ने कहा:

​पहले खरीदा गया तेल: भारतीय तेल कंपनियां आज उस कच्चे तेल (स्टॉक) का इस्तेमाल कर रही हैं, जिसे दो से ढाई महीने पहले खरीदा गया था, जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कीमतें काफी ऊंची थीं।

​भविष्य की स्थिति: यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई यह गिरावट अगले 2-3 महीने तक टिकी रहती है, तो तेल कंपनियां समीक्षा करेंगी। फिलहाल तुरंत कटौती की उम्मीद करना एक काल्पनिक स्थिति होगी।

​तेल कंपनियों का नुकसान: केंद्रीय मंत्री ने खुलासा किया कि 30 जून तक पेट्रोल-डीजल और एलपीजी (LPG) को लागत से कम कीमत पर बेचने के कारण देश की तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कंपनियां अभी उस घाटे और महंगे कच्चे तेल की प्रोसेसिंग से उबर रही हैं।

​वैश्विक स्तर की तुलना में भारत में बहुत कम बढ़ीं कीमतें

​केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया के संकट के कारण जहां दुनियाभर में पेट्रोल की कीमतें औसतन 35% तक बढ़ गईं, वहीं भारत ने अपने नागरिकों पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया।

​पिछले 4 महीनों में दुनिया और भारत के पड़ोसी देशों में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी:

​फ्रांस, जर्मनी और इटली: फ्रांस में 17.74%, जर्मनी में 19.05% और इटली में 18.39% कीमतें बढ़ीं (विकसित देशों में औसत 20% की बढ़ोतरी)।

​पड़ोसी देश: पाकिस्तान में 39.77%, बांग्लादेश में 42.69%, श्रीलंका में 36.66% और नेपाल में 20.3% दाम बढ़े (पड़ोसी देशों में औसत 35% की बढ़ोतरी)।

​भारत की स्थिति: भारत में पेट्रोल की कीमत में सिर्फ 5.58% की बढ़ोतरी हुई। जून 2022 से जून 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 5.58% और डीजल की कीमत में महज 6.23% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

​होर्मुज संकट का भारत पर नहीं पड़ा कोई असर

​हरदीप पुरी ने कहा कि इतने बड़े वैश्विक संकट के बावजूद मार्च से जून के बीच भारत में न तो कहीं ईंधन की कमी हुई, न कोई शटडाउन हुआ और न ही पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लगीं। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा प्रबंधन क्षमता को सिर्फ ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) में मौजूद भंडार से नहीं मापा जा सकता, भारत इस मामले में बेहद आत्मनिर्भर और अनोखा देश है।

​ग्राहकों को राहत देने के लिए सरकार ने सहा राजस्व का नुकसान

​दिल्ली में पिछले चार सालों में पेट्रोल की कीमत लगभग 96 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हुई है। मंत्री ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार ने पहले ही एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में ₹10 प्रति लीटर की कटौती करके आम जनता को बड़ी राहत दी थी, जिसके कारण सरकारी खजाने को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व (रेवेन्यू) का नुकसान उठाना पड़ा था।

​ओएमसी (OMC) और प्राइवेट कंपनियों के पास मौजूद महंगा स्टॉक खत्म होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम स्थिर रहने के बाद ही स्थिति साफ होगी। फिलहाल किसी निश्चित समय सीमा या कटौती का अंदाजा लगाना सही नहीं होगा।

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