Friday, July 3, 2026
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यूपी में ओवैसी का ‘गेम चेंजर’ दांव: AIMIM लड़ेगी मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव, सपा-कांग्रेस गठबंधन की बढ़ी टेंशन

यूपी में ओवैसी का ‘गेम चेंजर’ दांव: AIMIM लड़ेगी मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव, सपा-कांग्रेस गठबंधन की बढ़ी टेंशन

​ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पार्टी की किस्मत आजमाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। ओवैसी ने सोशल मीडिया पर यूपी के नक्शे और अपनी तस्वीर के साथ “यूपी में पूरा गेम बदल देंगे” का नारा पोस्ट कर सियासी हलचल तेज कर दी है। हाल ही में यूपी के दो दौरे (बहराइच और बिजनौर) कर चुके ओवैसी के इस कदम से विपक्षी खेमे में साफ तौर पर बेचैनी देखी जा रही है।

​सपा-कांग्रेस गठबंधन को क्यों सता रहा है डर?

​उत्तर प्रदेश में भले ही AIMIM आज तक एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत सकी है, लेकिन उसका चुनावी मैदान में उतरना विपक्षी दलों के समीकरण बिगाड़ने के लिए काफी है:

​वोट बैंक में सेंधमारी: उत्तर प्रदेश का मुस्लिम वोट बैंक पारंपरिक तौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के ‘इंडिया गठबंधन’ (India Alliance) के पक्ष में लामबंद रहता है। अकेले सपा को करीब 80 से 90 फीसदी मुस्लिम वोट मिलते रहे हैं।

​जीत-हार का कम मार्जिन: ओवैसी जिन सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे, वहां यदि वे जीत दर्ज नहीं भी कर पाते और केवल 5,000 से 10,000 वोट भी हासिल कर लेते हैं, तो यह सीधे तौर पर सपा-कांग्रेस के खाते से कटेगा। कम अंतर वाली सीटों पर यह नुकसान गठबंधन के उम्मीदवार की हार का कारण बन सकता है।

​विपक्षी दल लगातार ओवैसी पर ‘बीजेपी की बी-टीम’ होने का आरोप लगाते रहे हैं और यही वजह है कि वे ओवैसी को अपने पाले में शामिल करने से बचते हैं।

​क्या छोटे दलों से हाथ मिलाएंगे ओवैसी?

​फिलहाल ओवैसी किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में नए विकल्प तलाशने के लिए उनकी बातचीत चल रही है:

​चंद्रशेखर आजाद और स्वामी प्रसाद मौर्य: ओवैसी की पार्टी आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ गठबंधन की संभावनाओं को टटोल रही है। हालांकि, अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका है।

​40 सीटों पर ओवैसी का असली फोकस, शौकत अली के नाम का ऐलान

​दावा बनाम हकीकत: कहने को तो AIMIM ने उत्तर प्रदेश की 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का माहौल बनाया है, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक ओवैसी का असली प्लान सिर्फ 40 मुस्लिम बहुल सीटों पर केंद्रित है। इन सीटों को चिन्हित कर संभावित उम्मीदवारों को तैयारी शुरू करने के संकेत दे दिए गए हैं।

​पहला बड़ा दांव: खुद असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट से AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को चुनावी मैदान में उतारने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

​बीजेपी के लिए फायदे का सौदा?

​फिलहाल के सियासी समीकरणों को देखें तो ओवैसी के इस रुख से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सीधे तौर पर फायदा मिलता दिख रहा है। मुस्लिम बहुल सीटों पर जब विपक्ष और ओवैसी के बीच मुस्लिम वोटों का बंटवारा होगा, तो वहां त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले में बाजी बीजेपी के हाथ लग सकती है। हालांकि, अगर भविष्य में ओवैसी किसी तरह ‘इंडिया गठबंधन’ का हिस्सा बन जाते हैं, तभी बीजेपी के लिए असली चुनौती खड़ी होगी।

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