Friday, July 3, 2026
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उत्तराखंड

देहरादून में राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दिए आपदा प्रबंधन के निर्देश, एआई और आधुनिक तकनीकों पर रहेगा जोर

देहरादून में राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दिए आपदा प्रबंधन के निर्देश, एआई और आधुनिक तकनीकों पर रहेगा जोर

​उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों को आपदा प्रबंधन को लेकर कड़े और प्रभावी निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

​मुख्यमंत्री ने मानसून के मद्देनजर पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय (कोऑर्डिनेशन) और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को बेहद जरूरी बताया।

​राहत-बचाव से आगे तकनीक आधारित प्रबंधन पर जोर

​मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आपदा प्रबंधन की सोच को केवल घटना के बाद राहत और बचाव कार्य तक ही सीमित न रखा जाए। अब पूरा ध्यान जोखिम न्यूनीकरण (रिस्क रिडक्शन), एडवांस प्लानिंग और तकनीक आधारित मैनेजमेंट पर होना चाहिए।

​आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राज्य में कई आधुनिक तकनीकों को जोड़ा जा रहा है:

​एआई (AI) आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम: संभावित खतरों की समय रहते सटीक जानकारी देने के लिए।

​डिजिटल मॉनिटरिंग और ड्रोन सर्विलांस: संवेदनशील इलाकों की हवाई और डिजिटल निगरानी के लिए।

​जीआईएस (GIS) मैपिंग और सैटेलाइट मॉनिटरिंग: डेटा के आधार पर जोखिम का सही आकलन करने के लिए।

​इन आधुनिक तकनीकों की मदद से दूरस्थ और बेहद संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाकर जन-धन की हानि को कम से कम किया जा सकेगा। इसके लिए राज्य की रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को भी लगातार सशक्त बनाया जा रहा है।

​72 घंटे के भीतर सभी जिलों को देनी होगी समीक्षा रिपोर्ट

​मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं है, बल्कि इसके दौरान सामने आई कमियों और अनुभवों का गंभीरता से विश्लेषण करना है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि सभी जनपद (जिले) अगले 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही, आम नागरिकों को आपातकालीन संपर्क नंबरों और प्राथमिक सावधानियों के प्रति जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए।

​हिमालयी पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान

​सीएम धामी ने रेखांकित किया कि पर्यावरण संरक्षण ही आपदा के जोखिम को कम करने का सबसे स्थाई माध्यम है। इसके लिए राज्य सरकार जल स्रोतों के संरक्षण, ग्लेशियरों के अध्ययन, व्यापक पौधारोपण और जनभागीदारी के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र (Himalayan Ecosystem) को सुरक्षित रखने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को देश का सबसे सक्षम और तकनीक-सक्षम आपदा प्रबंधन मॉडल बनाना है।

​आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन और आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी

​योजनाओं का विमोचन: इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन योजना’ के साथ-साथ राज्य के सभी 13 जिलों की ‘जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं’ का आधिकारिक विमोचन किया।

​अत्याधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन: मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF) और अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया।

​इस प्रदर्शनी में एनडीआरएफ के सीबीआरएनई (CBRNE – रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक) आपदाओं से निपटने वाले अत्याधुनिक उपकरण मुख्य आकर्षण रहे। इसके अलावा डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन और सोनार सिस्टम जैसे आधुनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी गई।

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