Wednesday, June 24, 2026
अन्तर्राष्ट्रीय

ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी F-15E फाइटर जेट के गिरने की नई वजह आई सामने, पायलट ने किया ‘जेलीफिश ड्रोन झुंड’ का दावा

ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी F-15E फाइटर जेट के गिरने की नई वजह आई सामने, पायलट ने किया ‘जेलीफिश ड्रोन झुंड’ का दावा

​वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया कूटनीतिक और सैन्य संघर्ष के दौरान बीते 3 अप्रैल को अमेरिकी लड़ाकू विमान F-15E के दुर्घटनाग्रस्त होने को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फाइटर जेट के पायलट ने दावा किया है कि मार गिराए जाने से ठीक पहले उसने आसमान में ‘जेलीफिश’ जैसे आकार में उड़ रहे ड्रोन्स का एक विशाल झुंड देखा था। यदि पायलट का यह दावा सच साबित होता है, तो इसे मॉडर्न वॉरफेयर (आधुनिक युद्ध) के इतिहास में एक बड़ा और खतरनाक बदलाव माना जा रहा है।

​अमेरिकी कमांडोज ने स्पेशल ऑपरेशन चलाकर बचाई थी पायलट की जान

​गौरतलब है कि 3 अप्रैल को ईरान के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट को मार गिराया गया था। ईरान के साथ चले इस संघर्ष में यह पहली बार था जब अमेरिका को अपने किसी फाइटर जेट का नुकसान उठाना पड़ा। विमान के गिरने के तुरंत बाद अमेरिकी कमांडोज ने एक बेहद जटिल स्पेशल ऑपरेशन चलाकर पायलट और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO) को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अभी तक विमान के क्रैश होने के असली कारणों का कोई आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।

​’एलियन तकनीक’ जैसा लग रहा था आसमान का वो नजारा

​विमान गिरने के शुरुआती कयासों में माना जा रहा था कि F-15E को ईरान के ‘माजिद’ इन्फ्रारेड एयर डिफेंस सिस्टम या किसी अन्य एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल से निशाना बनाया गया होगा। लेकिन अब पायलट के बयान ने पूरी जांच का रुख मोड़ दिया है। सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट ने बताया कि उसने कई ड्रोन्स को आसमान में एक-दूसरे से जुड़े हुए देखा, जिनके ठीक नीचे कई छोटे ड्रोन्स लटके हुए थे। पायलट के अनुसार, दूर से देखने पर यह पूरा ढांचा किसी ‘एलियन तकनीक’ की तरह प्रतीत हो रहा था।

​क्या है यह ‘जेलीफिश ड्रोन स्वार्म’ टेक्नोलॉजी?

​रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पायलट ने जिस तकनीक को देखा, वह असल में ‘जेलीफिश ड्रोन स्वार्म’ (Jellyfish Drone Swarm) हो सकती है। इस तकनीक की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

​मदरशिप कंट्रोल: इसमें एक मुख्य बड़ा ड्रोन (मदरशिप) होता है, जो अपने साथ जुड़े कई छोटे ड्रोन्स को नियंत्रित करता है।

​मेश नेटवर्किंग: झुंड के सभी छोटे-बड़े ड्रोन ‘मेश नेटवर्किंग’ तकनीक के माध्यम से आपस में डेटा शेयर करते हैं और एक पूरी यूनिट के रूप में काम करते हैं।

​जेलीफिश आकार: यह पूरा नेटवर्क हवा में तैरते हुए दूर से किसी जेलीफिश जैसा दिखाई देता है।

​पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती, अमेरिकी एजेंसियां सतर्क

​इस तरह का ड्रोन सिस्टम पारंपरिक रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से चकमा देने में सक्षम होता है। ये बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए एक बड़े इलाके की निगरानी कर सकते हैं और एक साथ मिलकर ‘कोऑर्डिनेटेड अटैक’ (सामूहिक हमला) कर सकते हैं।

​यदि ईरान ने युद्ध के दौरान वास्तव में इस तरह की तकनीक का विकास और सफल इस्तेमाल कर लिया है, तो यह भविष्य की जंग के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल देगा। फिलहाल, अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पायलट के इस दावे की पुष्टि करने में पूरी सतर्कता बरत रही हैं, क्योंकि विमान दुर्घटना के दौरान पायलट गंभीर रूप से घायल हुआ था और एजेंसियां सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही हैं।

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