Wednesday, June 24, 2026
धर्म

निर्जला एकादशी व्रत नियम: भूलकर भी न करें ये 5 काम, जानें पूरे व्रत के नियम

निर्जला एकादशी व्रत नियम: भूलकर भी न करें ये 5 काम, जानें पूरे व्रत के नियम

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और फलदायी एकादशियों में से एक माना जाता है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इसमें पूरे 24 घंटे अन्न-जल का त्याग किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत करने से अन्य सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।

निर्जला एकादशी व्रत की प्रमुख नियम

सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक निर्जल रहें: व्रत शुरू करने से पहले संकल्प लें। स्वास्थ्य खराब होने पर चिकित्सक की सलाह से थोड़ा जल ले सकते हैं, लेकिन पारंपरिक रूप से बिल्कुल जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।

सात्विक भोजन: व्रत से पहले (दशमी तिथि) और पारण (द्वादशी) पर सात्विक भोजन करें। अनाज, चावल, नमक से परहेज रखें।

भगवान विष्णु की पूजा: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करें। तुलसी पत्र अर्पित करें (लेकिन व्रत के दिन तुलसी तोड़ने से बचें)।

दान-पुण्य: व्रत के बाद जल कलश, छाता, वस्त्र, फल आदि जरूरतमंदों को दान करें।

जागरण और भक्ति: रात में भजन-कीर्तन करें, विष्णु सहस्रनाम पढ़ें। नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

भूलकर भी न करें ये 5 काम

जल का सेवन: निर्जला व्रत का मूल नियम है। मुंह की सफाई के लिए कुल्ला कर सकते हैं, लेकिन पीने से व्रत टूट जाता है।

अन्न, चावल और तामसिक भोजन: चावल, गेहूं, दाल, प्याज, लहसुन, मांस, अंडा, शराब आदि बिल्कुल न खाएं। इनसे व्रत का फल नष्ट हो जाता है।

क्रोध, झूठ और विवाद: गुस्सा करना, बहस करना, किसी का अपमान या निंदा न करें। शांत और सकारात्मक मन रखें।

नाखून-बाल काटना या तुलसी तोड़ना: इन कार्यों से बचें। व्रत के दिन पेड़ की टहनियां तोड़ना या दातुन का उपयोग भी वर्जित माना जाता है।

सोना या आलस्य: रात में जागरण करें। अनावश्यक नींद या आलस्य से बचें, भक्ति में लगे रहें।

निर्जला एकादशी 2026 में 25 जून को रखी जा रही है। व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर सही मुहूर्त में करें और ब्राह्मण या गरीबों को भोजन कराएं।

नोट: स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो तो व्रत डॉक्टर की सलाह से रखें। व्रत का मुख्य उद्देश्य भक्ति और आत्मशुद्धि है।

यह व्रत श्रद्धा और नियमों के साथ रखने पर असीम पुण्य प्रदान करता है। जय श्री विष्णु!

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