राजनीति

सुवेंदु सरकार का पहला पूर्ण बजट: भाजपा ने बताया ‘नए बंगाल का शिलान्यास’, टीएमसी ने उठाए डीए, कर्ज और बेरोजगारी पर सवाल

सुवेंदु सरकार का पहला पूर्ण बजट: भाजपा ने बताया ‘नए बंगाल का शिलान्यास’, टीएमसी ने उठाए डीए, कर्ज और बेरोजगारी पर सवाल

​कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने सोमवार को अपना पहला पूर्ण बजट पेश कर दिया है। इस बजट को लेकर राज्य में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है, जहां सत्ता पक्ष (भाजपा) इसे जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला और ऐतिहासिक बता रहा है, वहीं मुख्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सरकार के सामने वित्तीय बोझ, बेरोजगारी और भत्तों में कटौती जैसी कई बड़ी चुनौतियां गिनाई हैं।

​भाजपा का दावा: ‘नए पश्चिम बंगाल’ के निर्माण की शुरुआत

​केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने इस बजट की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने जिस ‘नए पश्चिम बंगाल’ के निर्माण का संकल्प लिया था, यह बजट उसके शिलान्यास की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम साबित होगा।

​वहीं, भाजपा विधायक सजल घोष ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट दूरदर्शी है और राज्य के आम नागरिकों के चेहरों पर मुस्कान लाने का कारण बनेगा।

​टीएमसी ने उठाए सवाल, सौगत रॉय ने गिनाईं राज्य की चुनौतियां

​तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और सांसद सौगत रॉय ने संतुलित लेकिन हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि चूंकि यह सरकार अभी नई है, इसलिए इसे काम करने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता यह जानना चाहती है कि सरकार राज्य की गंभीर समस्याओं का समाधान कैसे करेगी।

​सांसद सौगत रॉय ने सरकार के सामने निम्नलिखित मुख्य चुनौतियां और सवाल रखे:

​8 लाख करोड़ का वित्तीय बोझ: राज्य पर वर्तमान में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है। विपक्ष का सवाल है कि नई सरकार इस वित्तीय बोझ को कम करने के लिए क्या रोडमैप ला रही है?

​सरकारी कर्मचारियों का डीए (DA): राज्य के सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (महंगाई भत्ता बकाया) लंबे समय से लंबित है। चुनाव के दौरान सरकार ने जो आश्वासन दिए थे, उन पर वह कब और कैसे अमल करेगी, यह बेहद महत्वपूर्ण है।

​बेरोजगारी और 2 लाख रिक्त पद: सौगत रॉय के अनुसार, राज्य में इस समय विभिन्न विभागों में करीब दो लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं। युवा पीढ़ी को उम्मीद देने के लिए सरकार इन पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

​महिला भत्ते में संख्या की कटौती: टीएमसी सांसद ने सरकार द्वारा महिला भत्ते की राशि को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने के फैसले का जिक्र किया। लेकिन साथ ही आरोप लगाया कि लाभार्थियों की संख्या में भारी कटौती की गई है—पहले यह भत्ता 2 करोड़ से अधिक महिलाओं को मिलता था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 50 लाख महिलाओं तक सीमित कर दिया गया है।

​लैंड पॉलिसी और उद्योगों की कमी: विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक अपनी ‘लैंड पॉलिसी’ (भूमि नीति) साफ नहीं की है और न ही राज्य में कोई नया उद्योग (इंडस्ट्री) लगाने की बात की है।

​सौगत रॉय ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य को 60 हजार करोड़ रुपये की जो वित्तीय सहायता मिलने की बात कही गई है, उसका उपयोग विकास कार्यों में किस प्रकार होता है, यह देखना होगा। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर भी सरकार से जनता को राहत देने की अपील की।

​”केंद्र और राज्य के बजट में बड़ा अंतर”

​आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने भी बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बजट और प्राथमिकताओं में बहुत बड़ा अंतर दिखाई देता है। उन्होंने भी सुवेंदु सरकार से अपील की कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें अब उनका बकाया डीए (DA) तुरंत मिलना चाहिए।

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