महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: महायुति गठबंधन की बंपर जीत, 17 में से 16 सीटों पर जमाया कब्जा; नासिक में बागी ने दिया झटका
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: महायुति गठबंधन की बंपर जीत, 17 में से 16 सीटों पर जमाया कब्जा; नासिक में बागी ने दिया झटका
मुंबई: महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनावों के सोमवार को आए नतीजों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की है। गठबंधन ने कुल 17 में से 16 सीटों पर अपना परचम लहराया है। हालांकि, नासिक सीट पर महायुति की इस प्रचंड जीत की लय टूट गई, जहां एक निर्दलीय (भाजपा के बागी) प्रत्याशी ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को करारा झटका दे दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस चुनाव में गठबंधन की जीत का नेतृत्व किया, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) को स्थानीय निकाय नेटवर्क के इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। गौरतलब है कि 18 जून को 11 सीटों पर हुए मतदान से पहले ही महायुति गठबंधन ने 6 सीटें निर्विरोध अपने नाम कर ली थीं। सोमवार को आए अंतिम नतीजों के बाद अब सीटों का गणित इस प्रकार है: भाजपा (11 सीटें), शिवसेना-शिंदे गुट (3 सीटें), एनसीपी-अजित पवार गुट (2 सीटें) और निर्दलीय (1 सीट)।
नासिक में सबसे बड़ा उलटफेर: बागी गोकुल गीते की नाटकीय जीत
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला और बड़ा उलटफेर नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र में देखने को मिला। यहां भाजपा के वरिष्ठ नेताओं गिरीश महाजन और उदय सामंत द्वारा किए गए तमाम राजनीतिक दांवपेच के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार (भाजपा के बागी) गोकुल गीते ने चुनाव मैदान से हटने से साफ इनकार कर दिया था।
गीते ने मुख्यधारा की बड़ी सार्वजनिक रैलियों के बिना एक अलग और जमीनी अभियान चलाया। उन्होंने महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के मौजूदा एमएलसी नरेंद्र दराडे को एक नाटकीय मुकाबले में शिकस्त दे दी। अपनी इस ऐतिहासिक जीत के बाद गोकुल गीते ने कहा कि यह परिणाम दबाव की रणनीति के खिलाफ “सत्य की विजय” है। नासिक के इन नतीजों ने महायुति के भीतर की आंतरिक कलह को भी उजागर कर दिया है।
क्षेत्रवार चुनावी नतीजे: कहाँ किसे मिले कितने वोट?
विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को लगभग हर क्षेत्र में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। विभिन्न क्षेत्रों के चुनावी आंकड़े इस प्रकार रहे:
भंडारा-गोंदिया: भाजपा के अविनाश ब्रम्हणकर ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार नरेश ईश्वरकर को 148 वोटों के अंतर से हराया। ब्रम्हणकर को 304 वोट मिले, जबकि ईश्वरकर को केवल 152 वोटों से संतोष करना पड़ा।
छत्रपति संभाजीनगर-जालना: भाजपा के सुहास शिरसाट ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 454 वोट हासिल किए और शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार गणेश लोखंडे (134 वोट) को बड़े अंतर से पराजित किया।
नांदेड़: महायुति के अमरनाथ राजुरकर ने 339 वोट हासिल करके एकतरफा जीत दर्ज की। यहां एमवीए उम्मीदवार कृष्णा पाटिल अष्टिकर को केवल 84 वोट मिले, जबकि वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के उम्मीदवार प्रशांत इंगोले मात्र 5 वोटों पर ही सिमट गए।
धाराशिव-लातूर-बीड़: भाजपा के बसवराज पाटिल ने रिकॉर्ड 845 वोट जीतकर बेहद आसानी से विधान परिषद में प्रवेश कर लिया।
सांगली-सतारा: भाजपा के धैर्यशील कदम ने जीत के लिए आवश्यक 443 वोटों का कोटा आसानी से पार किया। उन्हें 591 प्रथम वरीयता के वोट मिले, और उन्होंने एनसीपी के अभय सिंह जगताप (295 वोट) को मात दी।
जलगांव: भाजपा के नंदकिशोर महाजन ने 577 वोटों के भारी-भरकम अंतर से एकतरफा जीत हासिल की।
”जादुई कलम और धन बल का खेल”: विपक्ष ने उठाए सवाल
जलगांव सीट पर मिली करारी हार के बाद पिछड़ रहे एमवीए उम्मीदवार शरद तायडे (शिवसेना यूबीटी) ने सार्वजनिक रूप से पूरी चुनाव प्रक्रिया की आलोचना की है। उन्होंने सत्ता पक्ष पर चुनाव में भारी धन बल (पैसे की ताकत) के इस्तेमाल का खुला आरोप लगाया। तायडे ने इस चुनावी परिणाम को “जादुई कलम” का खेल बताते हुए मतदान यंत्रों की निष्पक्षता पर भी गहरा संदेह व्यक्त किया।
हालांकि, महायुति के रणनीतिकारों का कहना है कि उनकी यह भारी जीत चुनाव चक्र की शुरुआत में ही तय हो गई थी, जब नामांकन वापसी के अंतिम दिन विपक्ष के कई उम्मीदवारों के पीछे हटने के बाद महायुति के 6 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आए ये नतीजे महायुति के लिए संजीवनी और एमवीए के लिए बड़ा आत्ममंथन का विषय हैं।
