ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला: UCC, वंदे मातरम और भीड़ हिंसा के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला: UCC, वंदे मातरम और भीड़ हिंसा के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की कार्यकारिणी बैठक में देश के वर्तमान हालातों और मुस्लिम समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के बाद कई बड़े फैसले लिए गए हैं। बोर्ड ने भाजपा शासित राज्यों में कथित तौर पर बढ़ रही भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग), मस्जिदों-मदरसों पर कार्रवाई, बुलडोजर अभियान, वंदे मातरम की अनिवार्यता और यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
बैठक के बाद जारी प्रेस नोट में बोर्ड ने आरोप लगाया कि देश में सोची-समझी रणनीति के तहत नफरत का माहौल बनाया जा रहा है और कई धर्मनिरपेक्ष (secular) राजनीतिक दल भी इन मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
जन-जागरूकता के लिए जारी होगा ‘विस्तृत दस्तावेज’
बोर्ड ने निर्णय लिया है कि मुसलमानों की मौजूदा स्थिति, सांप्रदायिक तनाव और मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर एक विस्तृत दस्तावेज (डॉक्यूमेंट) तैयार कर प्रकाशित किया जाएगा। इसके जरिए देश के जागरूक नागरिकों और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों का ध्यान इन गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित किया जाएगा।
मुख्य प्रस्ताव और कानूनी लड़ाई का ऐलान
बैठक में विभिन्न समसामयिक और कानूनी मुद्दों पर बोर्ड ने अपनी रणनीति स्पष्ट की:
भोजशाला/कमाल मौला मस्जिद मामला: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर चिंता जताते हुए बोर्ड ने कहा कि यह पूजा स्थल अधिनियम (Places of Worship Act), 1991 की भावना के विपरीत है। बोर्ड ने मस्जिद कमेटी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती का स्वागत करते हुए कानूनी लड़ाई में हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।
वंदे मातरम की अनिवार्यता का विरोध: बोर्ड ने साफ किया कि यदि केंद्र या कोई भी राज्य सरकार वंदे मातरम को अनिवार्य बनाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। पश्चिम बंगाल के स्कूलों और सहायता प्राप्त मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य करने के फैसले को बोर्ड ने मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया और इस पर रोक लगाने वाले कलकत्ता हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत किया।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC): उत्तराखंड और गुजरात के बाद अन्य राज्यों में यूसीसी लागू करने की तैयारियों पर चिंता व्यक्त की गई। बोर्ड का तर्क है कि यूसीसी कोई अनिवार्य संवैधानिक प्रावधान नहीं है और इसे थोपना धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है। उत्तराखंड यूसीसी की तर्ज पर अन्य राज्यों के कानूनों को भी अदालत में चुनौती दी जाएगी।
देशव्यापी आंदोलन के लिए बनेगी ‘एक्शन कमेटी’
मुसलमानों के अधिकारों, संवैधानिक प्रावधानों, सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर बोर्ड ने एक बड़े देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। इसके लिए एक विशेष एक्शन कमेटी का गठन किया जाएगा, जो देश के विभिन्न सामाजिक, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक समूहों के साथ मिलकर आगे की रणनीति और आंदोलनों की दिशा तय करेगी।
बैठक में शामिल रहे देश भर के प्रमुख चेहरे
इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने की, जबकि संचालन महासचिव मौलाना फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने किया। बैठक में देश भर से मुस्लिम समाज के कई शीर्ष नेता और पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
मौलाना अरशद मदनी (अध्यक्ष, जमीयत उलेमा-ए-हिंद)
असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम प्रमुख व सांसद)
सैयद सदातुल्लाह हुसैनी (अमीर-ए-जमात, जमात-ए-इस्लामी हिंद)
