राजनीति

‘ऑपरेशन टाइगर’ पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान: आदित्य ठाकरे, कांग्रेस और सपा ने दलबदल की राजनीति को बताया ‘लोकतंत्र के लिए खतरा’

‘ऑपरेशन टाइगर’ पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान: आदित्य ठाकरे, कांग्रेस और सपा ने दलबदल की राजनीति को बताया ‘लोकतंत्र के लिए खतरा’

​मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) और सांसदों के पाला बदलने को लेकर सियासी माहौल चरम पर पहुंच गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के दिग्गजों ने बागी जनप्रतिनिधियों पर चौतरफा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं ने दलबदल की इस राजनीति को मतदाताओं के साथ धोखा और लोकतांत्रिक व संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया है।

​”हिम्मत है तो इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाएं”: आदित्य ठाकरे

​शिवसेना (यूबीटी) के विधायक और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने पार्टी छोड़कर जाने वाले बागी सांसदों को सीधे शब्दों में चुनौती दी है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों ने पाला बदला है, उनमें अगर जरा भी नैतिकता बची है, तो उन्हें तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।

​आदित्य ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा:

​”यदि इन बागी सांसदों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व और उनके समर्थन पर इतना ही भरोसा है, तो वे दोबारा चुनाव लड़कर जनता का सामना करें। हमारी पार्टी ने हमेशा लोगों का दिल और विश्वास जीता है। अगर चुनाव होते हैं, तो जनता अपनी राय और जनादेश के जरिए सच सबके सामने ला देगी।”

​आदित्य ठाकरे ने आगे आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के भीतर विपक्ष को लेकर एक गहरा डर का माहौल है। यही वजह है कि पहले सांसदों को तोड़ा गया और अब आगे चलकर विधायकों व अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने साफ किया कि चाहे जो भी परिस्थिति हो, उनकी पार्टी अकेले दम पर अपना संघर्ष जारी रखेगी।

​”एजेंसियों और डर के दम पर दलबदल असंवैधानिक”: भाई जगताप

​कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) भाई जगताप ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव भारतीय लोकतंत्र का सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

​जगताप ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का डर दिखाकर, दबाव बनाकर या बल प्रयोग के माध्यम से पार्टी बदलने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह पूरी तरह से असंवैधानिक है। यह तरीका देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को पूरी तरह से नष्ट कर रहा है।

​”मतदाताओं के साथ सरासर अन्याय”: अबू आज़मी

​समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक अबू आज़मी ने भी ‘ऑपरेशन टाइगर’ की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीतिक उठापटक में आम मतदाताओं की भावनाओं और उनके पवित्र जनादेश की खुलेआम अनदेखी की जाती है।

​अबू आज़मी ने राजनीतिक शुचिता का मुद्दा उठाते हुए कहा:

“जब कोई नेता किसी खास पार्टी के सिंबल, झंडे और विचारधारा के नाम पर जनता से वोट मांगकर जीत हासिल करता है, तो चुनाव के बाद निजी स्वार्थ के लिए पार्टी बदल लेना मतदाताओं के साथ सबसे बड़ा अन्याय है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए अब यह अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए कि दलबदल करने वाला कोई भी नेता पहले इस्तीफा दे और फिर से चुनाव लड़े। यह राजनीतिक टूट-फूट देश के लोकतांत्रिक ढांचे को खोखला कर रही है।”

​विपक्ष के इन तीखे हमलों और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं ने महाराष्ट्र की राजनीतिक हलचल को एक बार फिर देश के केंद्र में ला दिया है।

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