Monday, June 22, 2026
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दो युवा वकीलों की जीत: पाकिस्तान में खत्म होगा 18% ‘पीरियड टैक्स’, बजट में घोषणा; जानें इसका वैश्विक इतिहास

दो युवा वकीलों की जीत: पाकिस्तान में खत्म होगा 18% ‘पीरियड टैक्स’, बजट में घोषणा; जानें इसका वैश्विक इतिहास

​इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार ने अपने नए बजट में महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। देश में सैनिटरी प्रोडक्ट्स (पैड्स) और कॉन्ट्रासेप्टिव (गर्भनिरोधक) पर लगने वाले 18 फीसदी सेल्स टैक्स को पूरी तरह से खत्म करने की घोषणा की गई है। दो युवा वकीलों की लंबी कानूनी लड़ाई और देशव्यापी अभियान के बाद सरकार को यह बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

​”महिलाओं की सेहत और सम्मान के लिए जरूरी”— वित्त मंत्री

​पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने बजट घोषणा के दौरान इस फैसले की अहमियत पर जोर दिया:

​सेहत और सम्मान: वित्त मंत्री ने कहा कि ये उत्पाद महिलाओं की सेहत, सम्मान और सामाजिक गतिविधियों में उनकी पूरी भागीदारी के लिए बेहद जरूरी हैं। इन्हें विलासिता (लग्जरी) के बजाय आवश्यक सामान की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

​बढ़ती आबादी पर चिंता: सरकार ने गर्भनिरोधकों पर से भी टैक्स हटाने का फैसला किया है। वित्त मंत्री के मुताबिक, पाकिस्तान आबादी के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है और परिवार नियोजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

​दो युवाओं ने बदली देश की सोच

​पाकिस्तान में इस दकियानूसी टैक्स को हटाने का श्रेय दो युवा वकीलों—अहसान जहांगीर खान (29 वर्ष) और महनूर ओमर (25 वर्ष) को जाता है।

​इन दोनों ने पिछले साल अक्टूबर में सरकार के खिलाफ अदालत में एक याचिका दायर कर इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया था।

​उन्होंने मांग की थी कि सैनिटरी पैड्स पर लगने वाले ‘पीरियड टैक्स’ को तुरंत खत्म किया जाए ताकि गरीब और जरूरतमंद लड़कियों तक इसकी पहुंच आसान हो सके।

​पाकिस्तान में मात्र 12% लड़कियां ही करती हैं पैड्स का इस्तेमाल

​संयुक्त राष्ट्र की बच्चों की एजेंसी ‘यूनिसेफ’ (UNICEF) के आंकड़े पाकिस्तान में महिलाओं के स्वास्थ्य की बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं:

​पाकिस्तान में सिर्फ 12% महिलाएं और लड़कियां ही बाजार में मिलने वाले सैनिटरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर पाती हैं। बाकी 88% महिलाएं कपड़े या घर के असुरक्षित विकल्पों पर निर्भर हैं।

​भारी टैक्स का बोझ: स्थानीय पैड्स पर 18% सेल्स टैक्स और आयातित (बाहर से मंगाए गए) प्रोडक्ट्स पर 25% अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगती थी। अन्य स्थानीय टैक्स मिलाकर पाकिस्तानी महिलाओं को इन जरूरी चीजों पर कुल 40% तक का सरचार्ज देना पड़ता था, जिससे ये उनकी पहुंच से बाहर हो गए थे।

​पीरियड टैक्स का वैश्विक इतिहास: कब और किस देश ने दी राहत?

​मासिक धर्म उत्पादों पर टैक्स हटाने की शुरुआत साल 2004 में हुई थी, जिसके बाद दुनिया के कई देशों ने इस दिशा में कदम उठाए:

​कीनिया (2004): यह दुनिया का पहला देश बना, जिसने सैनिटरी पैड और टैम्पोन पर से 60% वैट (VAT) को पूरी तरह खत्म कर एक मिसाल कायम की थी।

​कनाडा (2015): भारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद कनाडाई सरकार ने जुलाई 2015 में मासिक धर्म उत्पादों पर से पूरी तरह से जीएसटी (GST) हटा दिया।

​भारत (2018): साल 2017 में लागू हुए नए टैक्स ढांचे में भारत सरकार ने सैनिटरी पैड्स पर 12% टैक्स लगा दिया था, जिसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने “ब्लड टैक्स” (खून पर कर) कहा था। चौतरफा अभियानों के बाद जुलाई 2018 में भारत ने सैनिटरी पैड्स को पूरी तरह टैक्स-मुक्त (0% GST) कर दिया।

​यूनाइटेड किंगडम (2021): ब्रेक्सिट (Brexit) प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद, 1 जनवरी 2021 को ब्रिटेन ने इस पर लगने वाले 5% टैक्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया।

​यूरोपीय संघ (2022): यूरोपीय संघ ने अपने दशकों पुराने नियमों में ढील देते हुए सदस्य देशों (जर्मनी, फ्रांस, इटली आदि) को सैनिटरी पैड्स पर वैट को न्यूनतम या पूरी तरह शून्य करने की कानूनी आजादी दी।

​स्कॉटलैंड: जहां पैड्स टैक्स-फ्री ही नहीं, बल्कि पूरी तरह ‘मुफ्त’ हैं

​टैक्स हटाने से भी कई कदम आगे बढ़ते हुए स्कॉटलैंड साल 2021 में दुनिया का पहला ऐसा देश बना, जिसने ‘पीरियड प्रोडक्ट्स फ्री प्रोविज़न एक्ट’ लागू किया। इस ऐतिहासिक कानून के तहत स्कॉटलैंड के सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर मासिक धर्म से जुड़े उत्पाद हर महिला के लिए पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं।

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