Saturday, June 20, 2026
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रांची RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम हमला: पाकिस्तान से जुड़े साजिश के तार, लखनऊ भी था अगला निशाना

रांची RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम हमला: पाकिस्तान से जुड़े साजिश के तार, लखनऊ भी था अगला निशाना

​रांची: 16 जून की रात रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले के मामले में पुलिस की जांच और मुख्य आरोपी के कबूलनामे से एक बेहद चौंकाने वाला और खतरनाक खुलासा हुआ है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से गिरफ्तार हुए मुख्य आरोपी अमन अंसारी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि यह हमला कोई स्थानीय विवाद या अचानक उपजा आक्रोश नहीं था, बल्कि सीमा पार पाकिस्तान से रची गई एक सोची-समझी आतंकी साजिश का हिस्सा था।

​पूछताछ में यह भी सामने आया है कि यदि झारखंड पुलिस समय रहते इस गिरोह को नहीं दबोचती, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी इनका अगला बड़ा टारगेट बनने वाली थी।

​पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था मुख्य आरोपी, पैसों का दिया गया था लालच

​पुलिस को दिए अपने आधिकारिक बयान में आरोपी अमन अंसारी ने कबूल किया है कि वह सीधे तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था। इस पूरी साजिश की पटकथा 2026 में ईद के मौके पर तब शुरू हुई, जब अमन मुंबई से अपने पैतृक निवास लोहरदगा (झारखंड) लौटा था। वहां अहमद अली नाम के एक व्यक्ति ने अमन का मोबाइल नंबर दो संदिग्ध हैंडलर्स— आविश राजपूत उर्फ ‘राणा जी’ और सहजाद उर्फ शाहनवाज आलम उर्फ ‘भट्टी’ को ट्रांसफर कर दिया।

​5 मई को राणा ने अमन को व्हाट्सएप (WhatsApp) पर संदेश भेजा: “झारखंड में कुछ बड़ा करना है। दो-तीन लड़के इंतजाम कर। पंजाब जाना होगा, हथियार लाना होगा।” जब अमन ने इसके बदले मिलने वाले फायदे के बारे में पूछा, तो उसे भारी रकम का लालच दिया गया, जिसके बाद वह देशविरोधी साजिश का हिस्सा बनने को तैयार हो गया।

​अमृतसर में होटल बुक कर रची गई रणनीति, फेल हुआ था हथियारों का प्लान

​योजना के मुताबिक, अमन लोहरदगा से दिल्ली और फिर वहां से बस पकड़कर अमृतसर (पंजाब) पहुंचा। वहां उसने एक होटल बुक किया और पैसे के लालच में अपने दो दोस्तों— सैफ अंसारी उर्फ रोहित और सयाम सुजान को भी इस काम में शामिल कर लिया।

​होटल में ही राणा के निर्देश पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम वाले सिम कार्ड का उपयोग कर एक नया व्हाट्सएप अकाउंट एक्टिवेट किया गया, जिसका इस्तेमाल आगे के कूटनीतिक संदेशों के लिए होना था। 11 जून को राणा ने अमन को पंजाब में एक तय ठिकाने पर हथियार लेने के लिए भेजा, लेकिन ऐन वक्त पर हथियारों का इंतजाम न हो पाने के कारण यह प्लान फेल हो गया और अमन 12 जून को वापस लोहरदगा लौट आया।

​”हमला करो और वीडियो भेजो, मिलेंगे 50-50 हजार रुपये”

​हथियारों का प्लान फेल होने के बाद, 15 जून की रात को पाकिस्तानी हैंडलर्स राणा और भट्टी ने दोबारा अमन से संपर्क साधा और नया टास्क दिया। उन्होंने व्हाट्सएप पर रांची स्थित आरएसएस (RSS) कार्यालय की तस्वीरें और जीपीएस (GPS) लोकेशन साझा करते हुए कहा: “रांची में आरएसएस कार्यालय पर बम फेंककर आग लगा देना है। काम पूरा होने पर, तुम सभी को पचास-पचास हजार रुपये मिलेंगे।”

​राणा का आदेश मिलते ही अगले दिन 16 जून को तीनों आरोपी ट्रेन से रांची पहुंचे। उन्होंने लेक रोड से खाली बोतलें, पेट्रोल, लट्टू का फीता और झोला खरीदा। इसके बाद एक होटल में कमरा बुक किया। रात को जब राणा का दोबारा फोन आया कि हमला आज ही करना है, तो आरोपियों ने असमर्थता जताते हुए कहा कि उन्हें बम बनाना नहीं आता। इस पर राणा ने उनके व्हाट्सएप पर ‘पेट्रोल बम’ (Molotov Cocktail) बनाने का एक ट्यूटोरियल वीडियो भेजा, जिसे देख-देखकर आरोपियों ने होटल के कमरे में ही बम तैयार किए।

​दो प्रयासों में किया हमला; वीडियो बनाकर हैंडलर को भेजा

​रात के समय तीनों आरोपियों ने एक ऑनलाइन कैब बुक की और संघ कार्यालय की तरफ बढ़े। पकड़े जाने के डर से उन्होंने कार्यालय से कुछ दूरी पहले ही कार रुकवा दी। इसके बाद अमन और सैफ ने अपने चेहरे को पूरी तरह कपड़े से ढका और दबे पांव कार्यालय के पास पहुंचे।

​पहला प्रयास: सैफ ने सबूत के तौर पर वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की और अमन ने पेट्रोल बम संघ कार्यालय की दीवार पर फेंका, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण बम फटा नहीं। दोनों डरकर वापस कार की तरफ भागे और राणा को फोन पर जानकारी दी। इस पर राणा भड़क गया और उन्हें दोबारा हमला करने के लिए डांटा।

​दूसरा प्रयास: दोनों आरोपी गाड़ी से दूसरा पेट्रोल बम लेकर दोबारा कार्यालय पहुंचे। इस बार उनका निशाना सटीक रहा और बम फट गया, जिससे वहां आग लग गई। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों कार से सीधे अपने होटल पहुंचे, हमले का वीडियो साक्ष्य के रूप में पाकिस्तानी हैंडलर राणा को भेजा और सो गए।

​लखनऊ दहलाने की थी तैयारी, कोडरमा स्टेशन पर दबोचे गए आरोपी

​अमन अंसारी ने पुलिस को बताया कि 17 जून की सुबह जब उसकी नींद खुली, तो पाकिस्तानी हैंडलर राणा का फिर फोन आया। राणा ने निर्देश दिया: “अब तुरंत वहां से निकलो और उत्तर प्रदेश के कानपुर पहुंचो। कानपुर से तुम्हें लखनऊ जाना है, जहां एक और बड़ी घटना को अंजाम देना है, जिसकी जानकारी बाद में दी जाएगी।”

​हैंडलर के निर्देश पर तीनों आरोपी 17 जून को ही कानपुर जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए। लेकिन इस बीच रांची पुलिस ने तकनीकी इनपुट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों को ट्रैक कर लिया था। जैसे ही ट्रेन झारखंड के कोडरमा स्टेशन पर पहुंची, पुलिस की विशेष टीम ने घेराबंदी कर तीनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया और तुरंत रांची ले आई। पुलिस अब इस मामले के अन्य स्थानीय कूटनीतिक कड़ियों और बैंक खातों में हुए वित्तीय लेनदेन की सघन जांच कर रही है।

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