उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई: हरिद्वार जमीन घोटाले में IAS वरुण चौधरी बर्खास्त, पूर्व DM कर्मेंद्र सिंह को मेजर पनिशमेंट
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई: हरिद्वार जमीन घोटाले में IAS वरुण चौधरी बर्खास्त, पूर्व DM कर्मेंद्र सिंह को मेजर पनिशमेंट
देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बेहद ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने हरिद्वार नगर निगम के बहुचर्चित भूमि खरीद घोटाले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस (IAS) अधिकारी वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
इसके साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी (DM) कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ ‘दीर्घ शास्ति’ यानी मेजर पनिशमेंट (Major Punishment) की संस्तुति की गई है। सरकार ने तत्कालीन एसडीएम (SDM) अजयवीर सिंह पर भी शिकंजा कसते हुए उनके खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां (Salary Increments) रोकने के कड़े निर्देश दिए हैं।
क्या है हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाला?
यह पूरा भ्रष्टाचार प्रकरण जून 2025 में सामने आया था। आरोप था कि हरिद्वार नगर निगम द्वारा ग्राम सराय स्थित कूड़े के ढेर (ट्रेंचिंग ग्राउंड) के पास की बेहद अनुपयोगी 2.370 हेक्टेयर भूमि को निजी भू-स्वामियों से सांठगांठ कर करोड़ों रुपये की अत्यधिक ऊंची कीमत पर खरीदा गया था।
जनता के पैसे के इस खुले दुरुपयोग का मामला उजागर होते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया था। सरकार ने शुरुआती जांच के बाद ही इस घोटाले में शामिल दो आईएएस और एक पीसीएस (PCS) अधिकारी समेत कुल सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया था।
विजिलेंस जांच में खुली परतें, रिकवरी के आदेश
मामले की गहराई से जांच के लिए इसे विजिलेंस (सतर्कता विभाग) को सौंपा गया था। विजिलेंस की जांच रिपोर्ट में अधिकारियों और भू-स्वामियों के बीच बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग की पुष्टि हुई। इसके बाद सरकार ने:
रजिस्ट्री निरस्त की: घोटाले से संबंधित तमाम सेल डीड (भूमि की रजिस्ट्रियां) तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गईं।
धन की रिकवरी: अनुचित लाभ कमाने वाले भूमि स्वामियों को भुगतान की गई करोड़ों रुपये की राशि को वापस वसूलने (रिकवरी) के सख्त आदेश जारी किए गए हैं।
पदीय दायित्वों में लापरवाही: DoPT को भेजी गई संस्तुति
जांच के अंतिम निष्कर्षों के बाद, जहां आईएएस वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने का फैसला हुआ, वहीं पूर्व डीएम कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया है। इन दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अंतिम कार्रवाई के लिए राज्य सरकार द्वारा केंद्र के ‘कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग’ (DoPT) को आधिकारिक संस्तुति भेज दी गई है।
”भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं”: सीएम धामी
इस ऐतिहासिक प्रशासनिक सर्जरी पर बात करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा:
”हमारी सरकार में भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शासन और प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित ही हमारे लिए सर्वोपरि है। जनधन का दुरुपयोग करने वाले और अपने पद का अनुचित लाभ उठाने वाले किसी भी दोषी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा, उनके खिलाफ आगे भी ऐसी ही कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।”
बड़ा प्रशासनिक संदेश:
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड के इतिहास में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी और नजीर पेश करने वाली कार्रवाइयों में से एक है। इस फैसले ने राज्य की नौकरशाही (Bureaucracy) को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त होने पर उनका पद और रसूख भी उन्हें कानून के डंडे से नहीं बचा पाएगा।
