अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच में रामलला के हार और चरण पादुका गायब होने का खुलासा
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच में रामलला के हार और चरण पादुका गायब होने का खुलासा
अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा और आभूषण चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि गर्भगृह से रामलला का हीरा जड़ित हार और सोने की चरण पादुकाएं भी गायब हैं, जिनकी चोरी होने की गहरी आशंका जताई जा रही है।
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज दोपहर बाद अयोध्या पहुंच रहे हैं, जहां वे रामलला के दर्शन करने के साथ-साथ एसआईटी (SIT) टीम से इस संवेदनशील मामले पर सीधे प्रगति रिपोर्ट ले सकते हैं।
पूछताछ में बड़ा खुलासा: सोने की ईंट बनाने का था प्लान, पर मिला कुछ नहीं
एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट और प्रबंधन से जुड़े पांच दर्जन से अधिक कर्मचारियों और सेवादारों से अब तक पूछताछ की है। गुरुवार को जांच टीम ने मंदिर के पुजारी, गोपाल राव, टिन्नू यादव और आभूषणों की देखरेख करने वाले कृष्ण देव तिवारी से आमने-सामने बैठाकर कड़े सवाल-जवाब किए।
पुजारी का बयान: राम मंदिर के पुजारी ने एसआईटी को बताया कि उन्होंने हीरा जड़ित हार और चरण पादुकाएं भगवान रामलला को पहनाने के बाद नियम के मुताबिक टिन्नू यादव को सुरक्षित वापस सौंप दी थीं।
टिन्नू यादव का दावा: जब टिन्नू यादव से इस बारे में पूछा गया, तो उसने दावा किया कि इन आभूषणों को गलाकर सोने की ईंट बनाने की योजना थी और इसी सिलसिले में आगे की बात हुई थी।
तिजोरी खाली, रसीद भी गायब: हालांकि, जब एसआईटी ने आभूषणों के प्रभारी कृष्ण देव तिवारी से इस दावे की पुष्टि की और जांच की, तो लॉकर से न तो कोई सोने की ईंट बरामद हुई और न ही इस प्रक्रिया से जुड़ी कोई आधिकारिक रसीद या दस्तावेज मिला।
चेन्नई से तलब किए गए ट्रस्टी, सीसीटीवी फुटेज न होने से बढ़ीं मुश्किलें
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को चेन्नई से आपातकालीन नोटिस भेजकर अयोध्या तलब किया। जांच टीम ने उनसे कई घंटों तक कड़ी पूछताछ की है।
एसआईटी की टीम दानपात्रों (गोपिकाओं) से नकदी निकालने, उसकी गिनती (काउंटिंग) करने से लेकर बैंक खातों में जमा करने की पूरी चेन और डिजिटल डेटा को खंगाल रही है। हालांकि, जांच में सबसे बड़ी बाधा तकनीकी स्तर पर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, घटना के कुछ महत्वपूर्ण दिनों के सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्डिंग गायब या उपलब्ध न होने के कारण एसआईटी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। टीम अब फॉरेंसिक और बैंकिंग रिकॉर्ड्स (डिजिटल ऑडिट) के जरिए अनियमितताओं का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
आज अयोध्या दौरे पर सीएम योगी; ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारियों को रखा गया दूर
एसआईटी की ताबड़तोड़ जांच के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज का अयोध्या दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। कानून-व्यवस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर वे जांच अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर सकते हैं।
इस दौरे से जुड़ा एक और बड़ा घटनाक्रम यह है कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक प्रोटोकॉल और कार्यक्रमों से ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों— चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को पूरी तरह दूर रखा गया है। सीएम की अगवानी और व्यवस्थाओं की कमान प्रोटोकॉल के तहत प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य वैकल्पिक चेहरों को सौंपी गई है, जिसे सरकार के कड़े रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में गरमाया मुद्दा
राम मंदिर में वित्तीय और आभूषणों की धोखाधड़ी का यह मामला अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। विपक्षी दलों ने इस घटना को करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए समयबद्ध और पूरी तरह निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मामला बेहद संवेदनशील है; जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी और जो भी व्यक्ति— चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो— दोषी पाया गया, उसे बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल सभी को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
