“वे खुद को बेचने के लिए बाजार में खड़े थे”: बागी सांसदों पर संजय राउत का तीखा हमला, आधी रात को 25-25 करोड़ के सौदे का लगाया आरोप
“वे खुद को बेचने के लिए बाजार में खड़े थे”: बागी सांसदों पर संजय राउत का तीखा हमला, आधी रात को 25-25 करोड़ के सौदे का लगाया आरोप
मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने पार्टी से बगावत करने वाले छह सांसदों पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा हमला बोला है। राउत ने दावा किया कि एनडीए (NDA) सरकार में शामिल होने की तैयारी कर रहे इन बागी सांसदों के बीच मंत्री पद को लेकर आपसी कलह मच गई है। उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज सांसदों को शांत करने के लिए आधी रात को भारी भरकम पैसों का लेनदेन और समझौता करना पड़ा है।
”यह पार्टी का बंटवारा नहीं, बल्कि वफादारी की सौदेबाजी है”
संजय राउत ने बागी सांसदों की तुलना बाजार में बिकने वाली वस्तुओं से करते हुए कहा कि वे इसे पार्टी का वैचारिक बंटवारा बिल्कुल नहीं मानते। राउत ने गरजते हुए कहा:
”कोई व्यक्ति पार्टी तब छोड़ता है जब वह किसी दूसरी विचारधारा से प्रभावित हो। लेकिन जब कोई खुद को बेचने के लिए बाजार में खड़ा हो और कोई दूसरा उसे खरीद ले, तो इसे विचारधारा नहीं बल्कि ‘सौदेबाजी’ कहते हैं। हमारे छह लोग दो दिन पहले बाजार में खड़े थे, उन्होंने खुद पर कीमत का टैग लगाया और बिक गए। वे किसी महान क्रांतिकारी सोच की वजह से नहीं गए, बल्कि उन्होंने अपनी वफादारी की बोली लगवाई है।”
संजय राउत ने सीधे तौर पर बागी सांसद संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर का नाम लेकर उन पर कड़ा निशाना साधा। इन सभी सांसदों ने पार्टी के सख्त ‘थ्री-लाइन व्हिप’ का उल्लंघन करते हुए दिल्ली में हुई एक अहम संसदीय बैठक से दूरी बना ली थी।
मंत्री पद की कलह दबाने के लिए आधी रात को ’25-25 करोड़’ का वादा!
संजय राउत ने खुलासा किया कि ये छह सांसद अभी तक मुंबई क्यों नहीं लौटे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में इस बात को लेकर भारी आंतरिक कलह (Internal Dispute) शुरू हो गई थी कि एनडीए सरकार में इनमें से किस एक को मंत्री पद मिलेगा, क्योंकि पद केवल एक ही खाली था।
राउत के मुताबिक, इस अफरातफरी को संभालने के लिए आधी रात को एक गुप्त समझौता किया गया। दावा किया गया है कि मंत्री पद न पाने वाले बाकी 5 नाराज सांसदों का मुंह बंद रखने और उन्हें शांत करने के लिए, अगले एक साल के भीतर प्रत्येक सांसद को 25 करोड़ रुपए अतिरिक्त देने का वादा किया गया है, बशर्ते वे सार्वजनिक रूप से कोई हंगामा न करें। राउत ने कहा कि वे सभी सांसद इस समय भारी पुलिस सुरक्षा के बीच कहीं छिपे हुए हैं।
भारी सुरक्षा पर सवाल: “पाप नहीं किया तो इतना डर क्यों?”
बागी सांसदों को दी गई कड़ी सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए संजय राउत ने महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “यदि आपने कोई अपराध या पाप नहीं किया है, तो आपको पुलिस के इतने बड़े दस्ते और सुरक्षा घेरे की क्या जरूरत है? क्या महाराष्ट्र का गृह विभाग सिर्फ गद्दारों को सुरक्षा देने के लिए है, जबकि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं?”
राउत ने भाजपा नेताओं के उस तर्क पर भी तंज कसा जिसमें कहा गया था कि सांसद इसलिए छोड़कर गए क्योंकि उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ जुड़ गए हैं। राउत ने कहा कि ये भाजपा नेता ‘तमाशा’ (मराठी लोकनाट्य) के ‘मावशी’ (एक मजाकिया सहायक पात्र) जैसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब ये छह सांसद चुनाव जीते थे, तब उन्हें महाविकास अघाड़ी (MVA) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ही जमीन पर खून-पसीना बहाकर जिताया था। क्या उन्हें तब नहीं पता था कि कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा है? अब अचानक कांग्रेस से यह नफरत क्यों दिखाई जा रही है?
”ED और CBI आधे घंटे के लिए रुक जाएं, तो भाजपा के सात टुकड़े होंगे”
भाजपा की राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रवाद पर सवाल उठाते हुए राउत ने पूछा कि क्या उनके किसी भी नेता ने देश की आजादी की लड़ाई में अपनी जान दी है? इसके साथ ही उन्होंने खुली चेतावनी देते हुए कहा, “अगर देश की जांच एजेंसियों— ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) को सिर्फ आधे घंटे के लिए रोक दिया जाए या निष्पक्ष कर दिया जाए, तो महाराष्ट्र में भाजपा सात टुकड़ों में बिखर जाएगी और गिरीश महाजन सबसे पहले पार्टी छोड़कर भागेंगे।”
ठाकरे गुट की सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू:
शिवसेना के स्थापना दिवस के मौके पर एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन और बड़े कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ठाकरे गुट ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है। व्हिप का उल्लंघन कर अनुपस्थित रहने वाले इन सभी छह सांसदों को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया है और उनकी संसदीय सदस्यता रद्द करने के लिए अयोग्यता की अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
