‘अगर साथी ही उंगली उठाएंगे तो पद छोड़ दूंगा, लेकिन चोरों को नहीं दूंगा नेतृत्व’ : कार्यकर्ताओं को संबोधित कर भावुक हुए उद्धव ठाकरे
‘अगर साथी ही उंगली उठाएंगे तो पद छोड़ दूंगा, लेकिन चोरों को नहीं दूंगा नेतृत्व’ : कार्यकर्ताओं को संबोधित कर भावुक हुए उद्धव ठाकरे
मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने अपना दर्द बयां करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं है कि उनके अपने ही साथी उनके नेतृत्व पर सवाल उठाएं। ठाकरे ने याद दिलाया कि इसी भावना के कारण उन्होंने पहले मुख्यमंत्री पद तक छोड़ दिया था।
’अक्षम समझें तो खुलकर बताएं, नेतृत्व सौंपने को तैयार हूं’
उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह पिछले 12-13 वर्षों से शिवसेना का नेतृत्व कर रहे हैं। अगर आज किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी को लगता है कि वह इस जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें पीठ पीछे बात करने के बजाय खुलकर बता देना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, “यदि कार्यकर्ता चाहें तो मैं तुरंत पद छोड़ने के लिए तैयार हूं। मैं किसी भी योग्य शिवसैनिक को मंच पर बुलाकर नेतृत्व सौंप सकता हूं। अगर पार्टी का ही कोई निष्ठावान व्यक्ति अगला शिवसेना प्रमुख बनता है तो मुझे बेहद खुशी होगी। लेकिन, मैं इस पार्टी और इसके नेतृत्व को चोरों के हाथों में कभी नहीं जाने दूंगा।”
संघर्ष के मैदान से पीछे नहीं हटेंगे
भावुक अपील के साथ ही उद्धव ठाकरे ने विरोधियों को कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह चुनौतियों से भागने वाले नेता नहीं हैं और पार्टी के सामने आने वाली हर मुश्किल का डटकर सामना करेंगे। उन्होंने कहा, “अगर संगठन का फैसला होगा तो मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन संघर्ष के मैदान से पीछे नहीं हटूंगा। हम डगमगाए नहीं हैं और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए डटे हुए हैं।”
विधान परिषद सदस्यता को लेकर उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि कोई भी शिवसैनिक मुझ पर उंगली उठाए कि मैंने मुख्यमंत्री पद से (2022 में) इस्तीफा दे दिया और (2026 में) विधान परिषद की सदस्यता जारी नहीं रखी।”
कांग्रेस में विलय के दावों पर पलटवार, भाजपा-शिंदे गुट को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने बागी सांसदों के उन दावों की कड़ी आलोचना की, जिनमें कहा गया था कि शिवसेना (उबाठा) का कांग्रेस में विलय हो सकता है। इस पर पलटवार करते हुए उद्धव ने कहा, “अगर 30 साल तक सहयोगी रहने के बावजूद हमने भाजपा में अपनी पार्टी का विलय नहीं किया, तो हम कांग्रेस में विलय कैसे कर सकते हैं? इसके विपरीत, मुझे आशंका है कि भाजपा की महाराष्ट्र इकाई जल्द ही (एकनाथ) शिंदे नीत शिवसेना का खुद में विलय कर सकती है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि हालिया घटनाक्रमों से शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ता निराश नहीं हुए हैं, बल्कि उनका जोश और अधिक बढ़ गया है।
उद्धव के बिना शिवसेना की कल्पना नहीं: अरविंद सावंत
इस बीच, शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद अरविंद सावंत ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के प्रति अपनी पूरी निष्ठा जताई। शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “जनता के मन में इन लोगों के खिलाफ भारी गुस्सा है, क्योंकि इन्होंने हमारी पीठ में छुरा घोंपा है। ‘गद्दार’ शब्द भी इनके लिए बहुत छोटा होगा।”
सावंत ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के बिना कोई भी शिवसैनिक कभी सोच ही नहीं सकता। शिवसेना का नेतृत्व केवल उद्धव ठाकरे जी को ही करना चाहिए। विरोधियों द्वारा जो अफवाहें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं, उस पर सभी शिवसैनिकों को विचार करना होगा।
