हाईवे यात्रा से पहले टायर में क्या भरवाएं: नाइट्रोजन या साधारण हवा? जानें कौन सी गैस है बेहतर
हाईवे यात्रा से पहले टायर में क्या भरवाएं: नाइट्रोजन या साधारण हवा? जानें कौन सी गैस है बेहतर
नई दिल्ली: जब भी हम अपनी गाड़ी से किसी लंबी रोड ट्रिप या हाईवे यात्रा पर निकलने की तैयारी करते हैं, तो अक्सर इंजन ऑयल, कूलेंट और ब्रेक की जांच तो कर लेते हैं, लेकिन टायर्स पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। लंबी दूरी के सफर में टायर्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि सफर पर निकलने से पहले टायर्स में साधारण हवा भरवानी चाहिए या नाइट्रोजन।
साधारण हवा बनाम नाइट्रोजन: क्या है अंतर?
आमतौर पर जो साधारण हवा हम पेट्रोल पंपों पर मुफ्त या बेहद कम पैसों में भरवाते हैं, वह पूरी तरह शुद्ध नहीं होती। उसमें लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन और 1% अन्य गैसें व नमी (Moisture) शामिल होती है। इसके विपरीत, टायर्स के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नाइट्रोजन गैस लगभग 93% से 95% तक शुद्ध होती है, जिसमें ऑक्सीजन और नमी की मात्रा न के बराबर होती है।
लंबे सफर में नाइट्रोजन के बड़े फायदे
टायर फटने का खतरा कम: जब गाड़ी हाईवे पर लगातार तेज रफ्तार में चलती है, तो सड़क और रबर के बीच घर्षण (Friction) होने से टायर अत्यधिक गर्म हो जाते हैं। साधारण हवा में मौजूद ऑक्सीजन गर्मी पाकर तेजी से फैलती है, जिससे टायर का प्रेशर अचानक बढ़ जाता है और टायर फटने की आशंका रहती है। वहीं, नाइट्रोजन एक ठंडी गैस है जो जल्दी गर्म नहीं होती और टायर के तापमान को नियंत्रण में रखती है।
बार-बार हवा कम न होना: साधारण हवा के कण (Molecules) छोटे होते हैं, जो टायर के रबर के बारीक छेदों से धीरे-धीरे बाहर निकल जाते हैं। यही वजह है कि हर हफ्ते-दस दिन में हवा चेक करानी पड़ती है। इसके विपरीत, नाइट्रोजन के कण बड़े होते हैं जो आसानी से बाहर नहीं निकल पाते, जिससे लंबी यात्रा के दौरान बार-बार प्रेशर चेक कराने का झंझट नहीं रहता।
बेहतर माइलेज और लंबी उम्र: टायर का प्रेशर सही रहने से सड़क पर गाड़ी की पकड़ (Grip) अच्छी बनी रहती है। इससे इंजन पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और गाड़ी बेहतर माइलेज देती है। इसके अलावा, साधारण हवा की नमी टायर के अंदरूनी हिस्से और रिम में जंग लगा सकती है, जबकि सूखी नाइट्रोजन गैस टायर और रिम को अंदर से सुरक्षित रखती है।
नाइट्रोजन के कुछ नुकसान और सीमाएं
फायदों के साथ-साथ नाइट्रोजन के इस्तेमाल में कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं:
उपलब्धता की कमी: साधारण हवा हर छोटे-मोटे पंचर की दुकान पर आसानी से मिल जाती है, लेकिन नाइट्रोजन के लिए आपको किसी बड़े पेट्रोल पंप या आधुनिक टायर शोरूम पर ही जाना पड़ता है।
अधिक खर्चीली: साधारण हवा जहां मुफ्त या महज 5-10 रुपए में मिल जाती है, वहीं चारों टायर्स में पहली बार नाइट्रोजन डलवाने का खर्च 100 से 200 रुपए तक आ सकता है।
निष्कर्ष
लंबे और तेज रफ्तार वाले सफर के लिहाज से नाइट्रोजन गैस सुरक्षा, माइलेज और टायर की लंबी उम्र के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित होती है। यदि बजट और उपलब्धता की समस्या न हो, तो हाईवे यात्रा पर निकलने से पहले टायर्स में नाइट्रोजन भरवाना ही समझदारी है।
