Saturday, June 20, 2026
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राज्यसभा चुनाव: एनडीए (NDA) पहली बार 150 के पार, दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब; ‘इंडिया’ गठबंधन में रार

राज्यसभा चुनाव: एनडीए (NDA) पहली बार 150 के पार, दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब; ‘इंडिया’ गठबंधन में रार

​नई दिल्ली: राज्यसभा की 26 सीटों पर हुए हालिया चुनाव के नतीजों ने संसद के उच्च सदन (Rajya Sabha) में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को एक ऐतिहासिक मजबूती प्रदान की है। इस चुनाव में कुल 26 में से 19 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज करते हुए एनडीए ने पहली बार उच्च सदन में 150 सांसदों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। इस बड़ी बढ़त के साथ ही एनडीए अब राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत (163 सीटें) के आंकड़े से महज 13 सीटें दूर रह गया है।

​दूसरी ओर, इस चुनाव ने विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर की आपसी कलह और अंतर्विरोधों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। चुनाव में विपक्षी गठबंधन के खाते में केवल 6 सीटें आई हैं, जबकि 1 सीट मिजोरम की क्षेत्रीय पार्टी के हिस्से में गई है।

​झारखंड में क्रॉस वोटिंग: विपक्ष की रणनीति फेल, परिमल नाथवानी की जीत

​इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर झारखंड में देखने को मिला। सूबे की दोनों राज्यसभा सीटों पर ‘इंडिया’ गठबंधन अपनी जीत तय मानकर चल रहा था और अति-आत्मविश्वास से भरा था। लेकिन ऐन वक्त पर विपक्षी खेमे के विधायकों में हुई क्रॉस वोटिंग ने पूरा पासा पलट दिया।

​इस क्रॉस वोटिंग का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को मिला और उन्होंने शानदार जीत हासिल की। चुनाव से पहले एनडीए के पास सदन में 148 सांसद थे, लेकिन नाथवानी की जीत और अन्य सीटों के नतीजों के बाद यह संख्या बढ़कर 150 तक पहुंच गई है।

​हार के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन में बढ़ी रार, कांग्रेस और आरजेडी आमने-सामने

​झारखंड में मिली इस अप्रत्याशित हार के बाद विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक में कड़वाहट बढ़ गई है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक उम्मीदवार प्रणव झा की हार के लिए सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस का आरोप है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और सीपीआई-एमएल (CPI-ML) के 6 विधायकों ने उनके उम्मीदवार को वोट नहीं दिया, जिसके कारण यह नुकसान हुआ।

​इस आरोप पर पलटवार करते हुए आरजेडी और वामपंथी दलों ने कांग्रेस को नसीहत दी है कि वह दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपने अंदर झांक कर देखे। सहयोगियों का कहना है कि कांग्रेस की हार उनके खुद के अति-आत्मविश्वास और कमजोर चुनावी रणनीति का नतीजा है।

​मिजोरम की क्षेत्रीय पार्टी ZPM ने रचा इतिहास, पहली बार उच्च सदन में एंट्री

​इस चुनाव ने पूर्वोत्तर (North-East) भारत की राजनीति में भी एक नया इतिहास लिखा है। मिजोरम की सत्तारूढ़ क्षेत्रीय पार्टी जोरम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) ने पहली बार देश के उच्च सदन में अपना खाता खोला है।

​ZPM के उम्मीदवार के. लाल्टलुआंगकिमा ने मुख्य विपक्षी दल एमएनएफ (MNF) की उम्मीदवार जोथानसांगी हमार को करारी शिकस्त देकर राज्यसभा की सीट पर कब्जा जमाया। साल 2017 में अस्तित्व में आई इस क्षेत्रीय पार्टी के लिए संसद के उच्च सदन में पहुंचना एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

​24 सीटों पर निर्विरोध चयन, नहीं पड़ी वोटिंग की जरूरत

​इस राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया की एक उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि कुल 26 सीटों में से 24 सीटों पर उम्मीदवारों का चयन सर्वसम्मति से हुआ। इन सीटों पर किसी अन्य प्रतिद्वंद्वी के न होने के कारण मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी और 11 जून को ही इनके परिणाम घोषित कर दिए गए थे। निर्विरोध चुनी गई इन 24 सीटों में से 19 पर एनडीए के उम्मीदवारों ने और 5 पर विपक्ष ने जीत दर्ज की थी।

​राजनीतिक मायने:

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद जहां निचले सदन (Lok Sabha) में विपक्ष पहले से अधिक मजबूत होकर उभरा था, वहीं राज्यसभा के इन नतीजों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को बड़ी राहत दी है। दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने से अब सरकार के लिए आने वाले समय में कड़े और महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) को संसद से पारित कराना काफी आसान हो जाएगा।

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