Saturday, June 20, 2026
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कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को कोर्ट की अवमानना का नोटिस, 3 जुलाई को अगली सुनवाई

कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को कोर्ट की अवमानना का नोटिस, 3 जुलाई को अगली सुनवाई

​कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों दिग्गज नेताओं को कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

​यह पूरा मामला टीएमसी की वार्षिक ‘शहीद दिवस’ रैली के दौरान कोलकाता की मुख्य सड़कों को पूरी तरह से ब्लॉक करने और आम जनता को परेशान करने से जुड़ा हुआ है।

​क्या है पूरा मामला और क्यों जारी हुआ नोटिस?

​हर साल 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस कोलकाता के धर्मतला में विक्टोरिया हाउस के बाहर अपनी बड़ी ‘शहीद दिवस’ रैली आयोजित करती है। अदालत में दायर एक याचिका में दावा किया गया था कि पिछली रैली के दौरान नियमों को ताक पर रखकर मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड जैसे सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण जंक्शन को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया था। इससे पूरे शहर की रफ्तार थम गई थी और आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

​याचिका में आरोप लगाया गया कि यह कृत्य कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा साल 2018 में दिए गए दिशा-निर्देशों का सीधा और स्पष्ट उल्लंघन है। इस याचिका पर शुक्रवार को प्रारंभिक सुनवाई करने के बाद जस्टिस अरिजीत बनर्जी की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को अवमानना का नोटिस भेजने का निर्देश जारी कर दिया।

​हाई कोर्ट का 2018 का ऐतिहासिक आदेश, जिसका हुआ उल्लंघन

​साल 2018 में कलकत्ता हाई कोर्ट की तत्कालीन डिवीजन बेंच (जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य और जस्टिस अरिजीत बनर्जी) ने शहर में होने वाली राजनीतिक रैलियों को लेकर कुछ कड़े और स्पष्ट नियम तय किए थे:

​रास्ता ब्लॉक न करने का नियम: शहर में कोई भी राजनीतिक रैली या बैठक किसी भी मुख्य और व्यस्त चौराहे (जंक्शन) को पूरी तरह से बंद नहीं कर सकती।

​इमरजेंसी सेवाओं के लिए जगह: पैदल चलने वालों और वाहनों की आवाजाही के लिए सड़क का कम से कम एक हिस्सा हमेशा खुला रखा जाना अनिवार्य है। एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं का रास्ता किसी भी कीमत पर नहीं रोका जा सकता।

​पुलिस की जिम्मेदारी: पुलिस को रैली से पहले ही ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार कर मीडिया के माध्यम से जनता को सूचित करना होगा, ताकि लोग वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकें।

​उपद्रव पर कार्रवाई: रैली के दौरान किसी भी तरह की तोड़फोड़, अत्यधिक शोर-शराबा या हिंसा होने पर आयोजकों और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान था।

​अब 3 जुलाई को होगी अगली नजर

​नई याचिका में कोर्ट को बताया गया कि सत्ताधारी दल (TMC) ने अपने ही नेताओं की मौजूदगी में कोर्ट के इन सभी नियमों की धज्जियां उड़ाईं, जिसके बाद कोर्ट ने दोनों शीर्ष नेताओं को जवाबदेह ठहराते हुए नोटिस थमाया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई 2026 को होगी, जहां देखना होगा कि टीएमसी नेतृत्व और उनकी कानूनी टीम कोर्ट के इस नोटिस पर क्या जवाब दाखिल करती है।

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