ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान शांति समझौता: 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे हस्ताक्षर; सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म, डोनाल्ड ट्रंप ने दी नाकेबंदी हटाने की मंजूरी
ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान शांति समझौता: 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे हस्ताक्षर; सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म, डोनाल्ड ट्रंप ने दी नाकेबंदी हटाने की मंजूरी
अंतरराष्ट्रीय डेस्क
तेहरान/वाशिंगटन: मध्य पूर्व (West Asia) में पिछले तीन महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता संपन्न हो गया है, जिसके तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा की गई है।
इस बात की आधिकारिक पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के कानूनी व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने की है।
19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ के हवाले से चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने एक टेलीविजन बयान में कहा, “ईरान और अमेरिका 19 जून (शुक्रवार) को स्विट्जरलैंड में शांति समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतिम मसौदे पर हस्ताक्षर करेंगे।”
इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि स्विट्जरलैंड में होने वाले इस हस्ताक्षर समारोह के तुरंत बाद वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए फिर से खोल दिया जाएगा।
वार्ता की सफलता अमेरिकी वादों को पूरा करने पर निर्भर: ईरान
ईरान के सरकारी टीवी चैनल IRIB के अनुसार, उप-विदेश मंत्री गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता पूरी तरह से शर्तों पर आधारित है। उन्होंने कहा:
”अपने परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने को लेकर अमेरिका के साथ शुरू होने वाली 60 दिनों की बातचीत की प्रक्रिया में ईरान का शामिल होना, इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका अपने शुरुआती वादों को पूरा करता है या नहीं। इन वादों की सत्यता और पुष्टि तेहरान (ईरानी सरकार) द्वारा अभी से लेकर हस्ताक्षर समारोह तक लगातार की जाएगी।”
पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने दी पहली जानकारी
इस बेहद जटिल और गुप्त वार्ता में मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर इसकी सफलता की घोषणा की।
शरीफ ने बताया कि दोनों देशों के बीच गहन और लंबी बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को रोकने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते को सुचारू रूप से लागू करने की तैयारी के लिए मध्यस्थ इस सप्ताह कई महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन करेंगे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: “लेदर ऑयल फ्लो!”
शहबाज शरीफ की घोषणा के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर इस खबर की पुष्टि की।
ट्रंप ने लिखा, “अमेरिका-ईरान शांति समझौता अब पूरा हो चुका है।” उन्होंने घोषणा की कि उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को तुरंत हटाने की पूर्ण मंजूरी दे दी है। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में लिखा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो। तेल को बहने दो!”
इजरायल ने जताई असहमति: ‘हम शर्तों से बाध्य नहीं’
जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया इस शांति समझौते का स्वागत कर रही है, वहीं इजरायल के रुख ने इस समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
इजरायल की प्रमुख समाचार साइट ‘मारिव’ (Ma’ariv) ने इजरायली कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई है। इस बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को दोटूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि “इजरायल इस अमेरिका-ईरान समझौते में शामिल ‘लेबनान से जुड़ी शर्त’ (युद्धविराम) के लिए खुद को कतई बाध्य नहीं मानता है।” इजरायल का यह रुख आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की शांति के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।
