Saturday, June 13, 2026
राजनीति

टीएमसी के कांग्रेस में विलय की अटकलों पर विराम: केसी वेणुगोपाल ने बताया बेबुनियाद, ‘इंडिया गठबंधन’ को मजबूत करने पर हुई चर्चा

टीएमसी के कांग्रेस में विलय की अटकलों पर विराम: केसी वेणुगोपाल ने बताया बेबुनियाद, ‘इंडिया गठबंधन’ को मजबूत करने पर हुई चर्चा

​नई दिल्ली:

‘इंडिया गठबंधन’ की बैठक के बाद पिछले दो दिनों में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी। मीडिया में टीएमसी के कांग्रेस में विलय को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर अब कांग्रेस हाईकमान ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इन खबरों को अफवाह और पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया है।

​केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की, तो उनका एकमात्र एजेंडा ‘इंडिया गठबंधन’ को मजबूत करना था। उन्होंने कहा, “सभी नेता इस लोकतंत्र विरोधी सरकार के खिलाफ लड़ाई को धार देना चाहते हैं। इस दिशा में हम सब मिलकर काम करेंगे और इसके अलावा अन्य किसी विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई।”

​दिल्ली में मुलाकातों का दौर और गर्माया सियासी बाजार

​पश्चिम बंगाल में टीएमसी विधायकों और सांसदों की आंतरिक बगावत के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ‘इंडिया गठबंधन’ की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली आई थीं। इस दौरान हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद ही विलय की अटकलें शुरू हुईं:

​सोनिया-ममता की मुलाकात: मंगलवार को ममता बनर्जी ने ’10 जनपथ’ जाकर सोनिया गांधी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। बैठक की शुरुआत में सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को गले लगाकर गर्मजोशी से स्वागत किया।

​राहुल-अभिषेक की बैठक: इसके अगले ही दिन ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी ’10 जनपथ’ पर राहुल गांधी के साथ करीब डेढ़ घंटे तक गहन चर्चा की।

​इन मुलाकातों पर कांग्रेस महासचिव और मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने सफाई देते हुए कहा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच 40 साल पुराने व्यक्तिगत संबंध हैं, इसलिए उनके बीच व्यक्तिगत बातें हुईं, इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

​कांग्रेस सूत्रों का आकलन: फिलहाल विलय की संभावना नहीं

​कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, तकनीकी रूप से यदि कोई दल कांग्रेस में विलय करना चाहता है तो पार्टी को कोई आपत्ति नहीं होगी। हालांकि, राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में 15 साल के शासन के बाद टीएमसी के खिलाफ जनता में नाराजगी (एंटी-इंकंबेंसी) देखी जा रही है। ऐसे में यदि इस वक्त विलय होता है, तो कांग्रेस को भी उस नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इसलिए निकट भविष्य में ऐसे किसी भी कदम की संभावना बेहद कम है, हालांकि राजनीति में किसी भी संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

​टीएमसी का रुख और ममता बनर्जी का सियासी संकट

​दिलचस्प बात यह है कि विलय की इन तमाम अटकलों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, टीएमसी के नेता अनौपचारिक तौर पर इस संभावना का खंडन कर रहे हैं।

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ममता बनर्जी बड़े सियासी संकट का सामना कर रही हैं। ऐसे कठिन समय में सोनिया गांधी और राहुल गांधी का उनके साथ खड़ा दिखना, ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा नैतिक और राजनीतिक समर्थन माना जा रहा है।

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