राष्ट्रीय

पश्चिम एशिया संकट पर PM मोदी की हाई-लेवल बैठक: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा की समीक्षा

पश्चिम एशिया संकट पर PM मोदी की हाई-लेवल बैठक: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा की समीक्षा

​नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति शृंखला में पैदा हुए व्यवधान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद स्थित अपने कार्यालय में कैबिनेट मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य फोकस भारत की ऊर्जा व ईंधन आपूर्ति, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और मर्चेंट नेवी में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर रहा।

​1. हाई-लेवल मीटिंग में कौन-कौन शामिल हुए?

​बैठक में सरकार और राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के प्रमुख चेहरे मौजूद रहे:

​शीर्ष कैबिनेट मंत्री: गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।

​विभागीय मंत्री: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, बंदरगाह एवं जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल।

​सुरक्षा नेतृत्व: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल।

​2. बैठक के मुख्य बिंदु और चिंताएं

​होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावट: इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बाधित होने से वैश्विक बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों की किल्लत और कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है।

​व्यापारिक जहाजों पर हमले व भारतीय नाविकों की सुरक्षा: कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों में भारतीय नाविकों की जान जाने पर सरकार ने गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने इस संवेदनशील मुद्दे को ईरान और अमेरिका—दोनों देशों के समक्ष प्रमुखता से उठाया है।

​3. कच्चे तेल की कीमतें और भारत का इम्पोर्ट बिल

​पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दरें प्रभावित हुई हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत के कच्चे तेल की बास्केट दरों में राहत भी देखी गई है:

​अप्रैल 2026: औसतन $114.5 प्रति बैरल

​जुलाई 2026 (22 जुलाई तक): गिरकर $77.6 प्रति बैरल पर आई।

​4. सप्लाई चेन और इकोनॉमी को बचाने के लिए सरकार के कदम

​सरकार ने संसद को सूचित किया कि संकट के बावजूद देश में ऊर्जा और कृषि इनपुट की आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए कई ठोस नीतियां लागू की गई हैं:

​कृषि व उर्वरक सुरक्षा: गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करके, आयात स्रोतों का विविधीकरण (Diversification) कर और बफर स्टॉक बनाए रखकर खाद व कृषि इनपुट की कमी नहीं होने दी गई।

​उद्योगों को राहत: चुनिंदा पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक पर अस्थायी रूप से सीमा शुल्क (Customs Duty) में छूट दी गई।

​लॉजिस्टिक्स व इंश्योरेंस सपोर्ट: एक्सपोर्टर्स को मदद देने के लिए ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल रिलीफ’ स्कीम शुरू की गई।

​टैक्स छूट और क्रेडिट सपोर्ट: माल ढुलाई व युद्ध-जोखिम (War-risk) से जुड़े बढ़ते खर्च को कम करने के लिए RoDTEP (निर्यात उत्पादों पर शुल्क और कर छूट) योजना के लाभ फिर शुरू किए गए। साथ ही ‘ECLGS 5.0’ के जरिए कारोबारियों को लिक्विडिटी सहायता दी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *