राजनीति

अडानी को बिजली ठेका देने के लिए 86 में से 84 टेंडर शर्तें बदली गईं: कांग्रेस

अडानी को बिजली ठेका देने के लिए 86 में से 84 टेंडर शर्तें बदली गईं: कांग्रेस

नई दिल्ली, 17 सितंबर: कांग्रेस ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर अडानी पावर को लाभ पहुंचाने के लिए बिजली खरीद टेंडर की शर्तों में बड़े पैमाने पर बदलाव करने का आरोप लगाया है। पार्टी के मीडिया एवं पब्लिसिटी चेयरमैन पवन खेड़ा ने दावा किया कि 1,320 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए जारी टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए और यूजेवीएन-टीएचडीसी की प्रस्तावित संयुक्त सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना को रद्द कर दिया गया।

यूजेवीएन-टीएचडीसी की परियोजना रद्द करने पर सवाल

कांग्रेस के मुताबिक, 16 जनवरी 2025 को यूजेवीएन-टीएचडीसी के संयुक्त उद्यम के तहत प्रस्तावित 1,320 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया। पार्टी का दावा है कि इसके बाद 3 फरवरी 2025 को उत्तराखंड सरकार ने नया टेंडर जारी किया। इसी दिन अडानी पावर ने छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित अपने पावर प्लांट के विस्तार के लिए पर्यावरण मंजूरी का आवेदन किया था।

पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि नए टेंडर में 86 में से 84 शर्तों को बदल दिया गया। उनके अनुसार, इनमें पावर प्लांट को उत्तराखंड के बाहर देश के किसी भी हिस्से में स्थापित करने की अनुमति, पूरी 1,320 मेगावाट बिजली एक ही बोलीदाता से लेने की शर्त और दूसरे राज्य से बिजली लाने की ट्रांसमिशन लागत को उत्तराखंड पर डालने जैसी शर्तें शामिल थीं।

25 साल के बिजली खरीद समझौते पर कांग्रेस के सवाल

खेड़ा ने दावा किया कि परियोजना की निर्माण समयसीमा बढ़ाने के साथ फिक्स्ड चार्ज की सीमा भी 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड द्वारा बिजली नहीं लेने की स्थिति में भी संबंधित कंपनी को 25 साल तक भुगतान मिलता रहेगा।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 25 अगस्त 2026 से 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद समझौता शुरू हुआ है और इसकी कुल अनुमानित राशि 1.66 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना छत्तीसगढ़ में चलेगी, जबकि बिजली की खरीद का भुगतान उत्तराखंड के संसाधनों से किया जाएगा।

कांग्रेस ने पूछे कई सवाल

पवन खेड़ा ने कहा कि 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1,320 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट और कोयला आपूर्ति के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा था। कांग्रेस के अनुसार, कोयला मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बावजूद जनवरी 2025 में संयुक्त परियोजना को रद्द कर दिया गया।

कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया कि यूजेवीएन-टीएचडीसी की प्रस्तावित परियोजना को क्यों खत्म किया गया और नए टेंडर की इतनी बड़ी संख्या में शर्तें क्यों बदली गईं। पार्टी ने यह भी पूछा कि पावर प्लांट को उत्तराखंड के बाहर स्थापित करने की अनुमति देने और 25 साल के बिजली खरीद समझौते की जरूरत क्यों पड़ी।

पवन खेड़ा ने आरोपों के संदर्भ में पूछा कि क्या टेंडर की शर्तें किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई थीं और इसे कांग्रेस द्वारा बताए गए ‘मोडानी मॉडल’ से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।

 

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