Thursday, July 30, 2026
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एंटी पेपर लीक अमेंडमेंट बिल पर राज्यसभा में तीखी बहस: खड़गे बोले— “सरकार ने डरकर माना युवाओं का दबाव”, मनुस्मृति वाले बयान पर जेपी नड्डा का पलटवार

एंटी पेपर लीक अमेंडमेंट बिल पर राज्यसभा में तीखी बहस: खड़गे बोले— “सरकार ने डरकर माना युवाओं का दबाव”, मनुस्मृति वाले बयान पर जेपी नड्डा का पलटवार

​नई दिल्ली:

राज्यसभा में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल 2026’ पेश किए जाने के बाद संसद के उच्च सदन में जोरदार बहस देखने को मिली। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिल को लेकर मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला। वहीं, भाषण के दौरान खड़गे द्वारा मनुस्मृति का जिक्र किए जाने पर सत्तापक्ष ने तीखा विरोध जताया।

​1. मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण की मुख्य बातें:

​”सिर्फ आंकड़ों का अंतर, नीयत का नहीं”: खड़गे ने शायरी से शुरुआत करते हुए कहा कि 2024 के मूल कानून के मुकाबले इस नए संशोधन में सिर्फ आंकड़े बदले गए हैं। सख्त सजा, ज्यादा जुर्माना, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट के प्रावधान से तब तक कुछ नहीं बदलेगा, जब तक कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी नहीं बनाया जाता।

​2024 में क्यों नहीं किया काम?: खड़गे ने सवाल उठाया, “विपक्ष 2024 से ही सख्त कानून की मांग कर रहा था। जो काम सरकार अब 2026 में कर रही है, उसे दो साल पहले क्यों नहीं किया? अगर युवाओं ने सड़कों पर उतरकर आंदोलन न किया होता, तो सरकार नहीं जागती। सरकार ने डरकर और अपनी कुर्सी बचाने के लिए युवाओं की मांगें मानी हैं।”

​छात्रों पर कार्रवाई और गृह मंत्री पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे बेगुनाह छात्रों पर लाठियां, पेलेट गन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसमें 100 से अधिक छात्र घायल हुए। उन्होंने सवाल किया कि गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर चुप क्यों हैं और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था?

​पेपर लीक का आंकड़ा: खड़गे ने दावा किया कि पिछले एक दशक में देश भर में केंद्र और राज्यों की कम से कम 152 परीक्षाएं लीक हुई हैं, जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।

​2. मनुस्मृति पर बयान से राज्यसभा में हंगामा:

​भाषण के दौरान खड़गे ने सरकार की नीतियों की तुलना ‘मनुवादी सोच’ से करते हुए मनुस्मृति की एक प्रति दिखाई और उसका अनुवाद पढ़कर सुनाया, जिसमें कथित रूप से भेदभावपूर्ण बातें लिखी थीं।

​उपसभापति का सवाल: इस पर उपसभापति ने खड़गे से पूछा कि क्या इस बिल का मनुस्मृति से कोई संबंध है? खड़गे ने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया और यूपीए कार्यकाल की सराहना के साथ भाषण खत्म किया।

​जेपी नड्डा (सदन के नेता) का जवाब: बीजेपी अध्यक्ष व राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने खड़े होकर कहा:

​”नेता प्रतिपक्ष का यह वक्तव्य समाज में विद्वेष, अशांति और विभाजन की भावना पैदा करने वाला है। उन्होंने जो पढ़ा, वह तथ्यों से परे है और मूल टेक्स्ट का हिस्सा नहीं है।”

​सुधांशु त्रिवेदी (बीजेपी सांसद): भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब देते हुए कहा कि खड़गे द्वारा उद्धृत पंक्तियां मूल ग्रंथ की नहीं बल्कि औपनिवेशिक काल में विलियम जोन्स द्वारा किए गए अनुवादों से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने भी अपनी पुस्तक में लिखा है कि वेदों में इस प्रकार का भेदभाव नहीं है।

​निष्कर्ष:

​एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान जहां विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, पैलेट गन के इस्तेमाल और परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर सरकार को घेरा, वहीं सत्तापक्ष ने विपक्ष पर जातीय और सामाजिक विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया।

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