ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर और 1970 वर्ल्ड कप विजेता ब्रिटो का 86 वर्ष की उम्र में निधन
ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर और 1970 वर्ल्ड कप विजेता ब्रिटो का 86 वर्ष की उम्र में निधन
रियो डी जेनेरियो:
1970 में फीफा विश्व कप का खिताब जीतने वाली ब्राजील की ऐतिहासिक टीम के सदस्य और दिग्गज डिफेंडर ब्रिटो का 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। ब्राजीलियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (सीबीएफ) ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि वह निमोनिया से पीड़ित थे और पिछले एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थे। ब्रिटो को ब्राजील के फुटबॉल इतिहास के महानतम डिफेंडरों में गिना जाता है।
1970 वर्ल्ड कप जीत के रहे महानायक
मेक्सिको में आयोजित 1970 के फीफा वर्ल्ड कप में ब्रिटो ने ब्राजील की खिताबी सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। महान फुटबॉलर पेले की मौजूदगी वाली इस टीम में ब्रिटो ने टूर्नामेंट का हर मैच खेला और वह एक भी मिनट के लिए मैदान से बाहर नहीं गए। अपनी ताकत और बेहतरीन रक्षात्मक कौशल (डिफेंसिव स्किल्स) के दम पर उन्होंने ब्राजील के डिफेंस को अभेद्य दीवार में बदल दिया था।
मैदान पर “हरक्यूलिस” के नाम से थे मशहूर
9 अगस्त, 1939 को रियो डी जेनेरियो में जन्मे ब्रिटो ने डिफेंस में विल्सन पियाजा के साथ एक यादगार जोड़ी बनाई थी। जहां पियाजा अपनी बेहतरीन तकनीक के लिए जाने जाते थे, वहीं ब्रिटो अपनी जबरदस्त ताकत और आक्रामक रक्षात्मक शैली के लिए मशहूर थे। उनकी इसी बेमिसाल शारीरिक क्षमता को देखते हुए खेल जगत में उन्हें “हरक्यूलिस” के नाम से पुकारा जाता था।
क्लब और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार रिकॉर्ड
राष्ट्रीय टीम: ब्रिटो ने 1964 में ब्राजील की राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया और 1972 तक कुल 61 मैच खेले। इस दौरान उनके रहते ब्राजील ने 45 मुकाबले जीते, 11 ड्रॉ खेले और केवल पांच मैच हारे। विश्व कप के अलावा उन्होंने कोपा रोका और टाका इंडिपेंडेंसिया जैसे प्रतिष्ठित खिताब भी जीते।
क्लब करियर: उन्होंने अपने क्लब करियर की शुरुआत वास्को द गामा से की थी। इसके बाद वह फ्लैमेंगो, क्रूजेरो, इंटरनेशनल, कोरिंथियंस, बोटाफोगो, और एथलेटिको परानाएंस जैसे ब्राजील के कई बड़े फुटबॉल क्लबों का हिस्सा रहे।
ब्राजील फुटबॉल संघ ने व्यक्त किया गहरा दुख
सीबीएफ के अध्यक्ष समीर जौद ने ब्रिटो के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा:
”ब्रिटो ब्राजील फुटबॉल इतिहास के सबसे महान डिफेंडरों में से एक थे और 1970 वर्ल्ड कप जीत में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी संघर्षशील भावना आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।”
