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अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की भारी बमबारी, ड्रोन मार गिराने के जवाब में लिया एक्शन; ट्रंप बोले- “अंत में सब ठीक होगा”

अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की भारी बमबारी, ड्रोन मार गिराने के जवाब में लिया एक्शन; ट्रंप बोले- “अंत में सब ठीक होगा”

​अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी सैन्य कार्रवाई सामने आई है। अमेरिकी सेना ने सोमवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि पिछले सप्ताह के अंत में ईरान द्वारा अमेरिका के एक एमक्यू-1 प्रीडेटर (MQ-1 Predator) ड्रोन को मार गिराए जाने के जवाब में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने रविवार को ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इस हमले में मुख्य रूप से ईरानी रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन नियंत्रण स्थलों को निशाना बनाया गया है। दूसरी तरफ, खाड़ी देश कुवैत ने भी सोमवार तड़के अपने ऊपर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की पुष्टि की है, जिन्हें उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नाकाम कर दिया।

​अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गेरुक और केशम द्वीप पर की त्वरित कार्रवाई

​अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने शनिवार और रविवार को ईरान के गेरुक शहर और केशम द्वीप के आसपास सीमित और सोच-समझकर हवाई हमले किए। सेंट्रल कमांड के अनुसार:

​”ये हमले अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने की ईरानी आक्रामक कार्रवाई के जवाब में किए गए। अमेरिकी विमानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, एक जमीनी नियंत्रण केंद्र और दो ऐसे खतरनाक ड्रोनों को नष्ट कर दिया, जो क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहे व्यापारिक पोतों के लिए बड़ा खतरा बने हुए थे।”

​अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में वायुसेना द्वारा ‘एमक्यू-9 रीपर’ का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन थल सेना अभी भी प्रीडेटर ड्रोन का उपयोग करती है। इस पूरी जवाबी कार्रवाई में किसी भी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की खबर नहीं है।

​ईरान ने मानी जवाबी हमले की बात, कुवैत में तड़के बजे सायरन

​ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ (IRNA) के अनुसार, ईरानी अर्द्धसैन्य बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने एक बयान जारी कर बताया कि अमेरिकी सेना ने उनके एक द्वीप पर स्थित दूरसंचार टावर (Telecom Tower) को निशाना बनाया था। आईआरजीसी ने इसके जवाब में पलटवार करने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन यह खुलासा नहीं किया कि उन्होंने किस स्थान को निशाना बनाया।

​इस बीच, कुवैत ने सोमवार तड़के देश की ओर आ रहे दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल हमलों को अपनी वायु रक्षा प्रणाली द्वारा इंटरसेप्ट किए जाने की पुष्टि की है। यह पूरी उथल-पुथल ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच आधिकारिक रूप से युद्धविराम (सीजफायर) लागू है, लेकिन इसके बावजूद हो रहे छिटपुट हमले पश्चिमी एशिया की नाजुक स्थिति को दर्शाते हैं।

​हिजबुल्लाह-इजरायल संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बरकरार

​पश्चिमी एशिया में अशांति का दायरा लगातार बढ़ रहा है। एक तरफ जहां अमेरिकी और ईरानी अधिकारी युद्धविराम की अवधि बढ़ाने के समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हालात चिंताजनक बने हुए हैं:

​होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने इस संकरे और महत्वपूर्ण समुद्री मुहाने पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है। इस रास्ते से कभी दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस के कारोबार का पांचवां हिस्सा गुजरता था।

​इजरायल-लेबनान संकट: इजरायल की सेना ने लेबनान में लितानी नदी से आगे के क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बढ़ा लिया है, जिसके जवाब में उग्रवादी समूह हिजबुल्लाह लगातार इजरायल के भीतर आत्मघाती ड्रोन हमले कर रहा है।

​”ईरान सचमुच समझौता करना चाहता है” — राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले पर शुक्रवार को अपने सलाहकारों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। हालांकि, उन्होंने अभी तक युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के मसौदे पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

​सोमवार तड़के अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक पोस्ट में ट्रंप ने सकारात्मक संकेत देते हुए लिखा:

​”ईरान सचमुच समझौता करना चाहता है और यह अमेरिका एवं हमारे साथ खड़े देशों के लिए एक बहुत अच्छा समझौता होगा। बस निश्चिंत रहिए, अंत में सब ठीक हो जाएगा- हमेशा ऐसा ही होता है!”

​सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा: ईरान ने दोबारा खोले अपने 50 अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकाने

​सीएनएन (CNN) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम की आड़ में ईरान ने अपनी सैन्य स्थिति को वापस मजबूत कर लिया है। अमेरिकी बमबारी के कारण ईरान की जिन अंडरग्राउंड मिसाइल फैसिलिटीज की टनल (सुरंगों के प्रवेश द्वार) बंद हो गए थे, उन्हें महीनों की खुदाई के बाद दोबारा खोल लिया गया है।

​सैटेलाइट से प्राप्त ताजा तस्वीरों से साफ झलकता है कि ईरान ने बमबारी से हुए बड़े-बड़े गड्ढों को भर दिया है और वहां की क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण कर लिया है। वर्तमान में ईरान के पास कुल 18 अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकाने मौजूद हैं, जिनकी 69 सुरंगों में से 50 टनल को ईरान सफलतापूर्वक दोबारा सक्रिय कर चुका है, जिससे वह अपनी मिसाइलों तक आसानी से पहुंच सकता है।

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