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पुतिन का ₹2.2 लाख करोड़ का ‘लॉन्गेविटी प्रोजेक्ट’: अंग बदलकर इंसानों को अमर बनाने की तैयारी में रूस

पुतिन का ₹2.2 लाख करोड़ का ‘लॉन्गेविटी प्रोजेक्ट’: अंग बदलकर इंसानों को अमर बनाने की तैयारी में रूस

​रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इंसानों की उम्र बढ़ाने और उन्हें अमर बनाने की एक बेहद महत्वाकांक्षी तकनीक पर काम कर रहे हैं। इसके लिए साल 2024 में ‘न्यू हेल्थ प्रेजर्वेसन टेक्नोलॉजी’ (New Health Preservation Technology) नाम से एक खास प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, जिसका कुल बजट 26 बिलियन डॉलर (लगभग ₹2.2 लाख करोड़) है। इस प्रोजेक्ट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2025 में बीजिंग में एक सैन्य परेड के दौरान पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इस मुद्दे पर हुई बातचीत एक ‘हॉट माइक’ (चालू माइक्रोफोन) में रिकॉर्ड हो गई थी, जिसमें पुतिन कह रहे थे कि इंसान अपने अंगों को बार-बार बदलकर अमर हो सकता है।

​क्या है रूस का यह एंटी-एजिंग प्रोजेक्ट?

​यह प्रोजेक्ट वर्तमान में रूस के सबसे प्रमुख और गुप्त वैज्ञानिक कार्यक्रमों में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य मानव कोशिकाओं (Cells) के बूढ़े होने की प्रक्रिया को रोकना और समय आने पर अंगों को ट्रांसप्लांट कर जीवनकाल को अनिश्चितकाल तक बढ़ाना है। रूस सरकार ने इस राष्ट्रीय नीति के जरिए साल 2030 तक देश में कम से कम 1,75,000 लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा है।

​इन 4 आधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं वैज्ञानिक

​इंसानों को लंबी उम्र देने और बुढ़ापा रोकने के लिए रूसी वैज्ञानिक मुख्य रूप से चार तकनीकों पर रिसर्च कर रहे हैं:

​जीन थेरेपी (Gene Therapy): रूस के उप विज्ञान मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की के अनुसार, वैज्ञानिक एक ऐसी जीन थेरेपी दवा विकसित कर रहे हैं जो सेलुलर एजिंग (कोशिकाओं का बूढ़ा होना) को धीमा कर देगी। इसे उम्र बढ़ने के खिलाफ सबसे बड़ी खोज माना जा रहा है।

​ऑर्गन बायोप्रिंटिंग (3D Printing): इस तकनीक में 3D प्रिंटर के जरिए जीवित ऊतकों (Living Tissues) का निर्माण किया जाता है। रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि वे मानव कार्टिलेज और चूहे की थायरॉइड ग्रंथि का सफल प्रिंट तैयार कर चुके हैं। उनका लक्ष्य 2030 तक इंसानों के सभी अंगों को पूरी तरह प्रिंट कर ट्रांसप्लांट करने लायक बनाना है।

​मिनी-पिग्स (Mini-Pigs): इस तकनीक के तहत विशेष नस्ल के छोटे सूअरों के शरीर में मानव अंगों को विकसित किया जाएगा, जिन्हें बाद में जरूरत पड़ने पर इंसानों के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सके।

​क्रायोथेरेपी (Cryotherapy): इसमें शरीर को बेहद कम तापमान (-100°C या उससे नीचे) में रखकर थेरेपी दी जाती है। राष्ट्रपति पुतिन की बिना शर्ट के आइस हॉकी खेलने की चर्चित तस्वीरों को भी विशेषज्ञ इसी थेरेपी से जोड़कर देखते हैं।

​पुतिन की बेटी मारिया वोरोन्टसोवा संभाल रही हैं कमान

​इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट का नेतृत्व राष्ट्रपति पुतिन की बेटी मारिया वोरोन्टसोवा (Maria Vorontsova) कर रही हैं, जो खुद एक पेशेवर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं। उनके साथ पुतिन के करीबी भौतिकशास्त्री मिखाइल कोवालचुक भी इस मिशन में शामिल हैं। कोवालचुक का मानना है कि विज्ञान एक दिन इतना सक्षम जरूर होगा कि इंसान अंग बदल-बदलकर हमेशा के लिए जवान और जीवित रह सकेगा।

​पुतिन की निजी दिलचस्पी या वैज्ञानिक हकीकत?

​व्लादिमीर पुतिन 16 साल की उम्र से ही अपनी फिटनेस, जूडो और आइस हॉकी के प्रति लगाव के लिए जाने जाते हैं। अपनी युवा और ताकतवर छवि को बनाए रखने की उनकी यही निजी दिलचस्पी अब रूस की राष्ट्रीय नीति बन चुकी है।

​हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर वैज्ञानिक जगत में कई तरह के संदेह भी जताए जा रहे हैं। रूस के निर्वासित बायोप्रिंटिंग विशेषज्ञ अलेक्जेंडर ओस्ट्रोव्स्की सहित कई आलोचकों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ी बहुत कम ‘पीयर-रिव्यू’ रिसर्च रिपोर्ट्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुई हैं। इसके अलावा, पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण रूस को इस रिसर्च के लिए जरूरी उन्नत उपकरण हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ आलोचकों का आरोप यह भी है कि इस प्रोजेक्ट में शामिल वैज्ञानिक पुतिन को खुश करने के लिए वही बातें बता रहे हैं जो वह सुनना चाहते हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।

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