राजनीति

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर ‘2022’ वाली सुगबुगाहट: क्या शिवसेना (UBT) में होने वाली है बड़ी बगावत?

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर ‘2022’ वाली सुगबुगाहट: क्या शिवसेना (UBT) में होने वाली है बड़ी बगावत?

​मुंबई/दिल्ली: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर वैसी ही बेचैनी और अटकलें तैरने लगी हैं, जिसने साल 2022 में महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इस बार चर्चा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि दिल्ली का भाजपा नेतृत्व सीधे उद्धव गुट के सांसदों के संपर्क में है और उन्हें कोई बड़ा “ऑफर” दिया गया है। कयास हैं कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे आगामी बड़े मुद्दों के लिए एनडीए इन सांसदों को अपने पाले में लाने या बाहर से समर्थन जुटाने की कोशिश में है।

​संजय राउत के ‘X’ पोस्ट से हवा मिली डर को

​कैमरे के सामने “ऑल इज वेल” कहने वाले शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत के ही एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इन अटकलों को और हवा दे दी। राउत ने त्रिपुरा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागियों के एक छोटी पार्टी में विलय की खबर साझा करते हुए लिखा:

​”लगता है कि महाराष्ट्र के दल-बदलुओं को भी खुद को बचाने के लिए किसी ‘कुंडू’ (त्रिपुरा के नेता) को ढूंढना पड़ेगा! आखिरकार, संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) तो यही कहती है!”

​राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस पोस्ट में महाराष्ट्र के दल-बदलुओं का जिक्र करना सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि उद्धव गुट के भीतर बगावत की खिचड़ी पक रही है और बागियों को दलबदल कानून से बचने का रास्ता समझाया जा रहा है।

​’मातोश्री’ की बैठक ने खोला कयासों का बाजार

​यह पूरा विवाद तब खुलकर सामने आया जब उद्धव ठाकरे ने मुंबई (मातोश्री) में लोकसभा सांसदों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। पार्टी के कुल 9 सांसदों में से केवल 4 ही व्यक्तिगत रूप से पहुंचे:

​अरविंद सावंत

​अनिल देसाई

​संजय दीना पाटिल

​राजाभाऊ वाजे

​बाकी के 5 सांसद मीटिंग से नदारद रहे: संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबाळकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटील आष्टीकर बैठक में नहीं पहुंचे। हालांकि, पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि ये सभी ऑनलाइन जुड़े थे, लेकिन सूत्रों के अनुसार, बैठक में उद्धव ठाकरे की सिर्फ नागेश पाटील आष्टीकर से ही बात हो पाई। इसके अलावा, ये वही पांच सांसद हैं जो इसके ठीक एक दिन पहले आदित्य ठाकरे के जन्मदिन पर भी नदारद थे। भ्रम दूर करने के लिए उद्धव ठाकरे ने अनुपस्थित सांसदों से दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।

​सांसदों के तेवर और नेताओं की सफाई

​संजय देशमुख की मुलाकात: बैठक से गायब रहने के अगले ही दिन सांसद संजय देशमुख दिल्ली में शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मिलने पहुंच गए। इस पर अनिल देसाई ने सफाई दी कि वे किसी निजी काम से मिले थे और ‘ऑपरेशन टाइगर’ जैसी मीडिया की चर्चाओं में कोई तथ्य नहीं है।

​राजाभाऊ वाजे का बयान: नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे ने 19 जून को मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में होने वाले शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पर असमंजस जताते हुए कहा कि वे दिल्ली से लौट रहे हैं और क्षेत्र के कार्यक्रमों के बाद ही मुंबई जाने पर फैसला लेंगे। उनके इस बयान ने चिंताएं और बढ़ा दी हैं।

​’कसम तो पहले वालों ने भी खाई थी’

​संजय राउत ने दिल्ली में पत्रकारों के सामने महायुति (BJP-शिंदे-अजित पवार) पर निशाना साधते हुए कहा कि अमित शाह, मोदी और फडणवीस पैसे के दम पर पार्टियां फोड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हमारे सभी 9 सांसद एकजुट हैं और सबने अपनी मां, बच्चों और भगवान की कसमें खाई हैं।

​हालांकि, जब एनडीटीवी ने उनसे खास बातचीत की, तो राउत ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा, “लोग कसम तो खाते रहते हैं, कसम तो पहले वालों ने भी खाई थी।” दूसरी तरफ, शिंदे गुट के मंत्री आशीष जयस्वाल ने इसे UBT का अंदरूनी मामला बताते हुए कहा कि बगावत कभी पहले से बताकर नहीं की जाती।

​निष्कर्ष: बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा करने वाली इस पार्टी में यदि 7 सांसदों की बगावत की यह पटकथा सच साबित होती है, तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के लिए अब तक का सबसे घातक और अपूरणीय झटका हो सकता है।

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