Thursday, September 10, 2026
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उत्तराखंड

मिडिल ईस्ट संकट का असर: नैनीताल में ईंधन की किल्लत, पेट्रोल-डीजल के लिए तय की गई लिमिट

मिडिल ईस्ट संकट का असर: नैनीताल में ईंधन की किल्लत, पेट्रोल-डीजल के लिए तय की गई लिमिट

​नैनीताल: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल संकट का असर अब उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों पर भी दिखने लगा है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल के सूखाताल स्थित पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री के लिए एक निश्चित सीमा (लिमिट) तय कर दी गई है। इसके तहत दोपहिया वाहनों (टू-व्हीलर) को अधिकतम ₹200 और चौपहिया वाहनों (फोर-व्हीलर) को ₹500 से लेकर ₹1000 तक का ही ईंधन दिया जा रहा है।

​वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण देश के कई राज्यों में रुक-रुक कर पेट्रोल-डीजल की किल्लत देखी जा रही है, जिसका सीधा असर अब पहाड़ों पर भी पड़ा है।

​सैलानियों की भारी भीड़ और मेंटेनेंस बनी वजह

​सूखाताल पेट्रोल पंप पर ईंधन की इस राशनिंग के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आ रहे हैं:

​पर्यटन सीजन और वाहनों की भरमार: गर्मियों के इस सीजन में नैनीताल, मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार और चारधाम यात्रा के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में पर्यटक उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। वाहनों की संख्या अचानक बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की डिमांड कई गुना बढ़ गई है, जिससे आपूर्ति चेन पर दबाव है।

​मेंटेनेंस का कार्य: कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के एमडी विनीत तोमर के अनुसार, जैसे ही ईंधन की आपूर्ति सामान्य होती है, यह लिमिट हटा दी जाती है। वहीं, पेट्रोल पंप के मैनेजर ने बताया कि पंप पर मेंटेनेंस का काम चलने की वजह से भी सप्लाई सुचारू रखने में दिक्कत आ रही है।

​”सैलानी परेशान न हों, इसलिए लिया फैसला” – पंप मैनेजर

​सूखाताल पेट्रोल पंप के मैनेजर पंकज रौतेला ने बताया कि तेल की यह लिमिट स्थायी (रेगुलर) नहीं है। यह कदम सिर्फ तब उठाया जाता है जब पीछे से आ रही आपूर्ति में कमी होती है।

​मैनेजर का बयान: “हम हर गाड़ी को इतना तेल दे रहे हैं जिससे वाहन चालक को रास्ते में कोई परेशानी न हो। नैनीताल से नीचे उतरते ही हल्द्वानी या अन्य मैदानी क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों से वाहन चालक अपनी जरूरत के मुताबिक पूरा ईंधन आसानी से भरवा सकते हैं।”

​फिलहाल, इस लिमिट की वजह से पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ घूमने आए पर्यटकों को भी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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