राजनीति

बंगाल में बड़ी जीत के बाद बीजेपी का ‘मिशन पंजाब’: सभी 117 सीटों पर अकेले लड़ेगी चुनाव, शाह संभालेंगे कमान

बंगाल में बड़ी जीत के बाद बीजेपी का ‘मिशन पंजाब’: सभी 117 सीटों पर अकेले लड़ेगी चुनाव, शाह संभालेंगे कमान

​पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में पहले से ही बीजेपी की सरकारें हैं और पार्टी वहां वापसी को लेकर आश्वस्त है। लेकिन, सबसे बड़ा रणनीतिक बदलाव पंजाब को लेकर किया गया है, जहां परंपरागत रूप से कमजोर रही बीजेपी ने इस बार सत्ता में आने के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है।

​अमित शाह संभालेंगे कमान, अकाली दल से कोई गठबंधन नहीं

​पश्चिम बंगाल में बीजेपी के चुनाव अभियान की अगुवाई कर वहां पहली बार पार्टी को सत्ता में स्थापित करने वाले गृह मंत्री अमित शाह खुद पंजाब की कमान संभाल रहे हैं।

​अकेले चुनाव लड़ने का फैसला: बीजेपी ने तय किया है कि वह इस बार अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) से कोई समझौता नहीं करेगी। पार्टी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार अकेले मैदान में उतारेगी।

​ड्रग्स के खिलाफ यात्रा: अमित शाह ने इस महीने पंजाब के बीजेपी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई है, जिसके बाद राज्य में नशे (ड्रग्स) के खिलाफ एक बड़ी यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। खुद शाह इस यात्रा की शुरुआत करेंगे।

​ग्रामीणों और किसानों को साधने की रणनीति

​पंजाब में बीजेपी का जनाधार हमेशा से शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहा है। ग्रामीण इलाकों में पैठ बनाने और कृषि कानूनों के कारण हुई किसानों की नाराजगी को दूर करने के लिए पार्टी ने विशेष कदम उठाए हैं:

​जट सिख अध्यक्ष: कांग्रेस से बीजेपी में आए जट सिख नेता केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, ताकि मालवा बेल्ट के ग्रामीण और किसान क्षेत्र को सीधा संदेश दिया जा सके।

​सीधा संपर्क अभियान: पार्टी कार्यकर्ता सीधे गांवों और किसानों के घरों तक जाकर केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और किसान-हितैषी नीतियों का ब्यौरा देंगे। संगठन को मजबूत करने के लिए बूथ स्तर पर ‘पन्ना प्रमुखों’ की नियुक्ति और प्रशिक्षण शुरू हो चुका है।

​रवनीत सिंह बिट्टू को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी, अंदरूनी कलह पर नजर

​केंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा न भेजकर पंजाब की सक्रिय राजनीति में उतारने का फैसला किया है। वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और 21 जून से पहले मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे सकते हैं, हालांकि वे मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं होंगे।

​इसके साथ ही, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को राज्यसभा भेजने और उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल करने की चर्चा है। दिल्ली में पंजाबी चेहरे हर्ष मल्होत्रा को अध्यक्ष बनाना और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पंजाब पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहना इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। दूसरी तरफ, ढिल्लों को अध्यक्ष बनाए जाने से नाराज कैप्टन अमरिंदर सिंह को अमित शाह ने मना लिया है, जबकि इस्तीफा दे चुके महासचिव डॉ. जगमोहन राजू से बातचीत जारी है।

​लोकसभा चुनाव और निकाय चुनावों के आंकड़ों से बढ़ा हौंसला

​2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी केवल 2 सीटें (पठानकोट और अबोहर) जीत सकी थी और उसे महज 6.6% वोट मिले थे। लेकिन हालिया आंकड़ों ने बीजेपी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं:

​लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन: पिछले लोकसभा चुनाव में भले ही बीजेपी कोई सीट नहीं जीत पाई, लेकिन उसे 18.56 प्रतिशत वोट मिले। पार्टी अकाली दल को पीछे छोड़कर राज्य में तीसरे नंबर पर आ गई और 23 विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर रही। 15 अन्य सीटों पर हार का अंतर बहुत कम रहा। इस तरह 117 में से 38 सीटों पर पार्टी की मजबूत उपस्थिति है, जो बहुमत के आंकड़े (59) से केवल 21 सीटें दूर है।

​निकाय चुनाव में बड़ी सफलता: हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने 2021 के 49 वार्डों के मुकाबले इस बार 170 से अधिक वार्डों पर जीत दर्ज की। सबसे बड़ी कामयाबी अबोहर नगर निगम में मिली, जहां बीजेपी ने 50 में से 28 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया। इसके अलावा, किसान राजनीति के गढ़ माने जाने वाले बठिंडा और मानसा में भी बीजेपी ने सीटें जीतकर अपना खाता खोला है।

​’आप’ के बागी नेताओं के लिए नो-एंट्री

​पश्चिम बंगाल चुनाव की तर्ज पर बीजेपी ने पंजाब में भी एक सख्त नीति अपनाई है कि वह आम आदमी पार्टी (AAP) या अन्य दलों के बागी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल नहीं करेगी। बीजेपी का मानना है कि सत्ताधारी ‘आप’ के विधायकों के खिलाफ जनता में भारी नाराजगी (एंटी-इंकमबेंसी) है, जिसे पार्टी अपने सिर नहीं लेना चाहती।

​इन बड़े मुद्दों पर घेरेगी सरकार को

​बीजेपी ने पंजाब के लिए अपना चुनावी एजेंडा साफ कर दिया है। पार्टी राज्य में बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरेगी। चूंकि पंजाब एक सीमावर्ती (बॉर्डर) राज्य है, इसलिए सरहदों की सुरक्षा और राज्य में बढ़ रहे अवैध धर्मांतरण के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। इस मिशन को कामयाब बनाने के लिए देश भर से बीजेपी और आरएसएस (RSS) के स्वयंसेवकों को पंजाब के शहरी और ग्रामीण इलाकों में सक्रिय किया जा रहा है।

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