राजनीति

बंगाल की हार और सांसदों की बगावत के बीच दिल्ली में ममता बनर्जी; सोनिया गांधी से की मुलाकात

बंगाल की हार और सांसदों की बगावत के बीच दिल्ली में ममता बनर्जी; सोनिया गांधी से की मुलाकात

​पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट के बीच दिल्ली के दौरे पर हैं। चुनावी नतीजों के बाद यह उनका पहला दिल्ली दौरा है, जहां वे विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एकजुटता और अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाने के प्रयासों में जुटी हैं। अपने दौरे के तीसरे दिन ममता बनर्जी मंगलवार को करीब 5 साल बाद कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास ’10 जनपथ’ पहुंचीं, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक गहन चर्चा हुई।

​दो दिनों के भीतर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले सोमवार को हुई इंडिया ब्लॉक की सातवीं बैठक में भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी, जहां सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को गले लगाया था।

​टीएमसी में ऐतिहासिक टूट: 20 लोकसभा सांसदों ने किया एनडीए का रुख

​ममता बनर्जी का यह दिल्ली दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम बंगाल में हार के बाद उनकी पार्टी पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है। विधायकों की बगावत के बाद अब तृणमूल कांग्रेस को दिल्ली (संसद) में भी बहुत बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों के बागी गुट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का बड़ा ऐलान कर दिया है।

​बागी गुट की नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पुष्टि की है कि 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजकर एनडीए के साथ जाने और सदन में उन्हें अलग मान्यता देने की मांग की गई है। चूंकि बागी गुट के पास दो-तिहाई से अधिक सांसदों का समर्थन है, इसलिए इन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा। इससे पहले राज्य में टीएमसी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी करीब 60 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए विधानसभा में अपना अलग गुट बना लिया था।

​सोनिया से मुलाकात और ‘विलय’ की अटकलें

​ममता और सोनिया की इस बैक-टू-बैक मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या कमजोर होती टीएमसी का कांग्रेस में विलय (Merge) हो सकता है। हालांकि, दोनों ही दलों के किसी वरिष्ठ नेता ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

​इस मुलाकात से जुड़ा एक अहम पहलू यह भी रहा कि जब ममता बनर्जी सोनिया गांधी से बातचीत कर रही थीं, ठीक उसी समय राहुल गांधी संगठन से जुड़ी बैठकों के लिए कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में मौजूद थे। राहुल गांधी की इस पूरी प्रक्रिया से दूरी को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि विलय की अटकलों में फिलहाल कोई ठोस दम नजर नहीं आता।

​विपक्षी बैठक में चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

​दिल्ली में आयोजित इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी और सोनिया गांधी बिल्कुल अगल-बगल बैठी नजर आईं। इस बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग (Election Commission) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में हेरफेर और निष्पक्षता की कमी के कारण चुनावी नतीजे प्रभावित हुए। बैठक में सभी विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक संयुक्त पत्र भेजने पर सहमति जताई है।

​क्या कांग्रेस बनेगी ममता की संकटमोचक?

​यह वही बंगाल है जहां विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ा था और राहुल गांधी ने ममता सरकार पर तीखे हमले किए थे। 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर ही टीएमसी का गठन किया था और बाद के वर्षों में कांग्रेस को कमजोर कर उसकी जमीन हथिया ली थी।

​अब बदले हुए हालात में जब टीएमसी बंगाल की सत्ता खो चुकी है और पार्टी के भीतर बड़ी फूट पड़ चुकी है, तब कांग्रेस के पास राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने का बड़ा मौका है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी के संकट पर चुटकी लेते हुए कहा कि—”टीएमसी के साथ आज वही हो रहा है जो उन्होंने कभी कांग्रेस के साथ किया था, हालांकि टीएमसी के आम कार्यकर्ताओं के लिए कांग्रेस के दरवाजे हमेशा खुले हैं।” ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या दिल्ली की यह ‘मुलाकात और झप्पी’ ममता बनर्जी को उनके सबसे बड़े सियासी संकट से बाहर निकाल पाती है या नहीं।

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