जिंदगी तो लंबी हुई, लेकिन सेहत का साथ छूटा: दुनिया में बढ़ रहा ‘मॉर्बिडिटी गैप’
जिंदगी तो लंबी हुई, लेकिन सेहत का साथ छूटा: दुनिया में बढ़ रहा ‘मॉर्बिडिटी गैप’
वाशिंगटन डीसी: दुनियाभर में आधुनिक चिकित्सा और बेहतर जीवन-स्तर की बदौलत इंसान की उम्र में तो इजाफा हुआ है, लेकिन बढ़ी हुई इस जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बीमारियों और शारीरिक असमर्थता के बीच बीत रहा है। प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट पब्लिक हेल्थ’ में प्रकाशित ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ (GBD) के हालिया अध्ययन से यह चिंताजनक रुझान सामने आया है।
अध्ययन के अनुसार, साल 1990 से 2023 के बीच कुल जीवनकाल और स्वस्थ जीवनकाल के बीच का अंतर लगातार बढ़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भाषा में इसे ‘मॉर्बिडिटी गैप’ (बीमारी के साथ बिताए जाने वाले वर्ष) कहा जाता है।
आंकड़ों में समझें सेहत का गणित
उम्र तो बढ़ी, पर पूरी सेहत नहीं मिली: 1990 में वैश्विक स्तर पर औसतन जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 64.6 वर्ष थी, जो 2023 तक बढ़कर 73.8 वर्ष हो गई। हालाँकि, पूरी तरह से स्वस्थ रहकर जीने की औसत उम्र 55.9 साल से बढ़कर केवल 63.1 साल ही हो सकी।
बढ़ता गैप: 1990 में लोग अपनी जिंदगी के औसतन 8.8 साल बीमारी या किसी शारीरिक परेशानी के साथ बिताते थे। 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 10.7 साल हो गया है। यानी पिछले तीन दशकों में अस्वस्थता के साल लगभग दो वर्ष बढ़ चुके हैं।
विकसित देशों में बीमारी के साथ लंबी जिंदगी का विरोधाभास
अध्ययन में एक विरोधाभासी बात सामने आई है कि जिन समृद्ध देशों में औसत उम्र सबसे ज्यादा है, वहाँ बीमारी के साथ बिताए जाने वाले साल भी सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं।
अमेरिका: यहाँ 2023 में मॉर्बिडिटी गैप सबसे अधिक 14 साल दर्ज किया गया।
ऑस्ट्रेलिया व कनाडा: ऑस्ट्रेलिया में यह अंतर 13.9 साल और कनाडा में 13.7 साल रहा।
विशेषज्ञ का नज़रिया:
इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) के निदेशक डॉ. क्रिस्टोफर जे.एल. के अनुसार, “अब केवल इंसान की उम्र बढ़ाना ही काफी नहीं है। स्वास्थ्य प्रणालियों को ऐसा ढाँचा तैयार करना होगा जिससे लोग केवल लंबा जीवन न जिएँ, बल्कि जीवन का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह स्वस्थ रहकर बिता सकें।”
महिलाओं पर अस्वस्थता का अधिक बोझ
लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, लैंगिक आधार पर भी यह अंतर साफ दिखाई देता है। दुनियाभर में महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहती हैं, लेकिन उन्हें बीमारियों का सामना भी पुरुषों से ज्यादा करना पड़ता है।
महिलाओं का मॉर्बिडिटी गैप: 2023 में औसतन 12.1 साल।
पुरुषों का मॉर्बिडिटी गैप: औसतन 9.3 साल।
IHME की सह-लेखिका कैथरीन बिसिग्नानो का कहना है कि महिलाओं की लंबी उम्र को बेहतर बनाने के लिए उन लंबे समय तक चलने वाले जोखिमों और बीमारियों पर शुरुआती दौर से ही काम करने की सख्त जरूरत है।
अस्वस्थता की मुख्य वजहें और बचाव के रास्ते
रिपोर्ट बताती है कि लोगों को लंबे समय तक असहाय बनाने में गैर-संचारी (Non-Communicable) बीमारियों का सबसे बड़ा हाथ है:
प्रमुख बीमारियाँ: हड्डियों व मांसपेशियों के विकार (खासकर कमर दर्द), मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ (अवसाद और चिंता), बुढ़ापे में सुनने की क्षमता कम होना और गिरने से लगने वाली चोटें।
बचाव योग्य जोखिम: शोधकर्ताओं का मानना है कि हाई ब्लड शुगर, बढ़ता मोटापा, तंबाकू का सेवन, और कुपोषण जैसे जोखिमों पर जीवनशैली में सुधार करके काबू पाया जा सकता है, जिससे अस्वस्थता के इन सालों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
