सत्य निकेतन हादसा: कांग्रेस का बड़ा खुलासा; कहा—’भाजपा सरकार ने जन विश्वास एक्ट से बिल्डरों को जेल भेजने वाली धारा 466(A) हटाई’
सत्य निकेतन हादसा: कांग्रेस का बड़ा खुलासा; कहा—’भाजपा सरकार ने जन विश्वास एक्ट से बिल्डरों को जेल भेजने वाली धारा 466(A) हटाई’
नई दिल्ली: सत्य निकेतन इमारत हादसे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि सरकार ने ‘जन विश्वास एक्ट’ के जरिए दिल्ली नगर निगम अधिनियम (DMC Act) की धारा 466(A) को खत्म कर दिया है, जिससे अवैध और खतरनाक निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई और जेल की सजा का खौफ समाप्त हो गया है।
1. धारा 466(A) हटाने का आरोप और इतिहास
1985 का प्रावधान: कांग्रेस नेता ने बताया कि 1985 में राजीव गांधी सरकार ने DMC एक्ट में धारा 466(A) जोड़ी थी। इसके तहत अवैध निर्माण पर FIR दर्ज कर 6 महीने की जेल और जुर्माने का प्रावधान था, जिसके डर से कई बिल्डरों पर कार्रवाई हुई थी।
बिल्डरों को छूट का आरोप: अभिषेक दत्त ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा इस धारा को समाप्त करने के बाद से दिल्ली में बिना डर के अवैध निर्माण और असुरक्षित बेसमेंट खुदाई का काम तेजी से बढ़ा है, जिससे सत्य निकेतन जैसी त्रासदियां हो रही हैं।
2. MCD के सर्वे को बताया ‘कागजी छलावा’
आंकड़ों पर सवाल: कांग्रेस ने MCD के स्ट्रक्चरल सर्वे के आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा कि 2023 से 2026 के बीच 1 करोड़ इमारतों के सर्वे का दावा किया गया, लेकिन केवल 103 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया।
सूची से बाहर ढह रहीं इमारतें: पार्टी ने उजागर किया कि हाल ही में सत्य निकेतन, मुस्तफाबाद, साकेत, रोहिणी और करोल बाग में ढही इमारतों में से एक भी MCD की ‘खतरनाक इमारतों’ की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं थी।
3. छात्रों की सुरक्षा और कांग्रेस की प्रमुख मांगें
हॉस्टल की कमी: कांग्रेस नेता ने कहा कि बीते 12 वर्षों में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल न बनने के कारण बाहर से आए छात्र बिना सुरक्षा मानकों वाले और अवैध रूप से निर्मित PG में रहने को मजबूर हैं।
प्रमुख मांगें:
DMC एक्ट की धारा 466(A) को तत्काल बहाल किया जाए।
दोषी MCD अधिकारियों को सिर्फ सस्पेंड करने के बजाय धारा 56(J) के तहत सेवा से सीधे बर्खास्त किया जाए।
पूरी दिल्ली में इमारतों का पारदर्शी स्ट्रक्चरल ऑडिट कराकर रिपोर्ट वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए।
मृतक छात्रों के परिजनों को ₹1-1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
