राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, पीएम मोदी पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार
राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, पीएम मोदी पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार
समन आदेश में हस्तक्षेप नहीं
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित विवादित टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने मामले को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए उन्हें छह सप्ताह की अंतरिम राहत दी गई है।
न्यायमूर्ति नितिन बोरकर की एकल पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट अवैधता या गंभीर त्रुटि नजर नहीं आती, जिसके आधार पर आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट हस्तक्षेप करे।
भाजपा कार्यकर्ता की शिकायत सुनवाई योग्य
राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई थी कि कथित टिप्पणी में भाजपा या किसी विशेष समूह का नाम नहीं लिया गया था, इसलिए भाजपा कार्यकर्ता की ओर से दायर मानहानि शिकायत कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल और पहचान योग्य राजनीतिक संगठन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा का प्रमुख चेहरा हैं, इसलिए यह पहले से तय नहीं किया जा सकता कि कथित टिप्पणी का पार्टी के सदस्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणियां केवल प्रधानमंत्री मोदी तक सीमित थीं या उनका व्यापक प्रभाव था, इसका निर्धारण सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर मुकदमे के दौरान किया जाएगा।
2018 की टिप्पणी से जुड़ा है मामला
यह शिकायत भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में दर्ज कराई थी। शिकायत 2018 में राजस्थान की एक रैली में राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर की गई थी।
श्रीश्रीमल ने दावा किया था कि टिप्पणी से प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ताओं की भावनाओं को भी ठेस पहुंची। राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ताओं सुदीप पसबोला और कुशल मोर ने शिकायतकर्ता के अधिकार और शिकायत की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए थे।
2019 में जारी हुआ था समन
मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायतकर्ता द्वारा पेश दस्तावेजों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अगस्त 2019 में राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर समन और आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।
अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद मानहानि मामले की कार्यवाही आगे बढ़ सकेगी। हालांकि, छह सप्ताह की अंतरिम राहत के चलते राहुल गांधी को इस अवधि में मजिस्ट्रेट अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से संरक्षण रहेगा, ताकि वह हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें।
