Tuesday, September 8, 2026
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सत्य निकेतन हादसा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा: एमिकस क्यूरी ने दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट; दिल्ली के सभी PG और हॉस्टलों के सुरक्षा ऑडिट की सिफारिश

सत्य निकेतन हादसा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा: एमिकस क्यूरी ने दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट; दिल्ली के सभी PG और हॉस्टलों के सुरक्षा ऑडिट की सिफारिश

​नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत ढहने के भीषण हादसे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। एमिकस क्यूरी (अदालत मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने शीर्ष अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर हादसे की विस्तृत जानकारी दी और राजधानी के कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे सभी पीजी (PG) व निजी हॉस्टलों की समयबद्ध सुरक्षा जांच (Safety Audit) कराने की सिफारिश की है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार, 10 सितंबर को सुनवाई होगी।

​1. सत्य निकेतन (P-14) इमारत हादसे का ब्योरा

​हादसे की भयावहता: 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन स्थित P-14 बहुमंजिला इमारत (‘Hostel Daze’ बॉयज PG) अचानक ढह गई। 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी इस इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है और 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

​प्रारंभिक कारण: हादसे के समय बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था और वहाँ पानी भरने की सूचना मिली थी।

​मालिक की गिरफ्तारी: दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में FIR (BNS की धारा 105, 290, 125) दर्ज कर संपत्ति के मालिक हरि ओम बंसल को 7 सितंबर को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है।

​MCD अधिकारियों पर गाज़: दिल्ली नगर निगम (MCD) ने साउथ ज़ोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार समेत 5 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

​पड़ोसी इमारत पर कार्रवाई: हादसे के बाद पास की इमारत P-213 को भी खतरनाक घोषित करते हुए MCD ने उसके ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए हैं।

​2. एमिकस क्यूरी की मुख्य सिफारिशें

​समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट: दिल्ली के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के आसपास चल रहे पीजी और निजी हॉस्टलों की नियमित व समयबद्ध सुरक्षा जांच की जाए।

​मानकों की पड़ताल: स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, वास्तविक निर्माण व मंजिलों की संख्या, बेसमेंट में किए गए अवैध बदलाव, लैंड यूज़ (भूमि उपयोग), स्ट्रक्चरल सेफ्टी (इमारत की मजबूती), फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्ज़िट जैसे सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच हो।

​बार-बार हादसों पर चिंता: अप्रैल 2022 में भी सत्य निकेतन में इमारत गिरने से 2 लोगों की मौत हुई थी, जिससे नियमित जांच और बिल्डिंग नियमों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

​3. दिल्ली हाईकोर्ट और सॉलिसिटर जनरल का रुख

​MCD को एक हफ्ते का अल्टीमेटम: 7 सितंबर को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को एक सप्ताह के भीतर दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

​MCD और यूनिवर्सिटी की जवाबदेही: हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी घटनाओं के लिए केवल PG मालिक ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और MCD भी ज़िम्मेदार हैं। बिना अनुमति बने निर्माणों के लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।

​सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता का बयान: SG तुषार मेहता ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि हमारी संवेदनाएँ छात्रों व अभिभावकों के साथ हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि हाईकोर्ट पहले ही इस मामले में जवाब मांगकर कड़े निर्देश जारी कर चुका है।

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