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मथुरा के बांके बिहारी मंदिर के पास बड़ा हादसा: बंदरों की लड़ाई के कारण गिरा मकान का छज्जा, कई श्रद्धालु घायल

मथुरा के बांके बिहारी मंदिर के पास बड़ा हादसा: बंदरों की लड़ाई के कारण गिरा मकान का छज्जा, कई श्रद्धालु घायल

​मथुरा के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के पास स्थित एक तंग गली में उस समय हड़कंप मच गया, जब अचानक एक निजी मकान का पुराना छज्जा भरभराकर नीचे गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में मंदिर मार्ग पर चल रहे कई श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे की मुख्य वजह छज्जे पर बड़ी संख्या में मौजूद बंदरों की आपसी लड़ाई थी, जिसके चलते जर्जर छज्जा अपना संतुलन खो बैठा और सीधे नीचे खड़े लोगों पर जा गिरा।

​चश्मदीद ने बताया कैसे हुआ हादसा

​घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय दुकानदार सुधांशु अग्रवाल ने बताया कि हादसे के वक्त बांके बिहारी मंदिर की ओर जाने वाली उस गली में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ थी। कुछ महिला श्रद्धालु उनकी दुकान के ठीक सामने खड़ी थीं। उसी दौरान, दुकान के ऊपर बने एक मकान के छज्जे पर कई बंदर आपस में हिंसक रूप से लड़ रहे थे। बंदरों के कूदने और आपसी टकराव के कारण अचानक छज्जा टूट गया और पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े सीधे नीचे खड़ी महिलाओं के सिर पर जा गिरे।

​पानी की बोतल लेते समय हुआ हादसा

​दुकानदार के मुताबिक, घायल महिलाएं उस समय उनकी दुकान से पानी की बोतल खरीदकर आपस में बातचीत कर रही थीं। जैसे ही वे थोड़ा किनारे की ओर बढ़ीं, ऊपर से भारी-भरकम छज्जा उनके ऊपर आ गिरा। हादसा इतना भयानक था कि महिलाओं का सामान वहीं बिखर गया और पूरी गली में खून फैल गया, जिसे देखकर आसपास मौजूद अन्य श्रद्धालु और स्थानीय लोग पूरी तरह घबरा गए।

​घटना के बाद मची अफरा-तफरी, जर्जर इमारतों पर उठे सवाल

​छज्जा गिरते ही पूरी गली में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए मलबे को हटाया और गंभीर रूप से घायल महिलाओं को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक टीम और स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई है।

​इस हादसे ने बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में स्थित पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर प्रशासन और मकान मालिकों द्वारा समय रहते इन पुराने छज्जों और जर्जर ढांचों की मरम्मत करा दी गई होती, तो इस हादसे को टाला जा सकता था। क्षेत्र में ऐसे कई पुराने और खतरनाक छज्जे आज भी मौजूद हैं, जो आए दिन बंदरों के आतंक के कारण भविष्य में किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं।

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