राजनीति

​दिल्ली में पिघली राजस्थान की ‘सियासी बर्फ’: गहलोत बोले— “यह फोटो जरूरी है”, पायलट ने मुस्कुराकर किया स्वागत

यह राजनीतिक समाचार काफी दिलचस्प है, विशेषकर राजस्थान की राजनीति के संदर्भ में जहाँ इन दोनों दिग्गजों के बीच की दूरियां हमेशा सुर्खियों में रहती हैं।

​दिल्ली में पिघली राजस्थान की ‘सियासी बर्फ’: गहलोत बोले— “यह फोटो जरूरी है”, पायलट ने मुस्कुराकर किया स्वागत

दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय (AICC) में बुधवार को आयोजित OBC एडवाइजरी काउंसिल की बैठक महज एक रणनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने राजस्थान कांग्रेस के दो सबसे बड़े दिग्गजों के बीच बदलते रिश्तों की एक नई इबारत लिख दी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच हुई ‘गर्मजोशी भरी’ मुलाकात ने दिल्ली से लेकर जयपुर तक राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

​”सर, AICC में आपका स्वागत है” मुख्यालय में जब अशोक गहलोत की गाड़ी रुकी, तो ठीक पीछे सचिन पायलट का काफिला भी पहुंचा। पायलट ने गाड़ी से उतरकर शिष्टाचार दिखाते हुए गहलोत का अभिवादन किया और कहा— “सर, AICC में आपका स्वागत है।” इस पर गहलोत ने न केवल मुस्कुराकर प्रतिक्रिया दी, बल्कि मीडिया कैमरों की ओर इशारा करते हुए चुटीले अंदाज में कहा— “यह फोटो जरूरी है। आप लोग इधर-उधर दिखाते रहते हैं, ऐसा कुछ नहीं है।” गहलोत की इस टिप्पणी पर वहां मौजूद पत्रकारों और खुद दोनों नेताओं के बीच ठहाके गूंज उठे।

​तल्खी के बाद ‘नरमी’ के संकेत राजस्थान की राजनीति में गहलोत और पायलट का रिश्ता पिछले कई सालों से ‘ठंडा-गर्म’ रहा है।

​2020 की बगावत: पायलट द्वारा की गई बगावत ने सरकार को संकट में डाल दिया था।

​बयानों के तीर: गहलोत द्वारा अतीत में पायलट के लिए इस्तेमाल किए गए कड़े शब्दों ने रिश्तों में दरार को गहरा किया था।

​2023 का धरना: पायलट ने अपनी ही सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दों पर अनशन किया था।

​क्या हैं इसके राजनीतिक मायने? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘फोटो जरूरी है’ वाले बयान के जरिए गहलोत ने न केवल एकजुटता का संदेश दिया है, बल्कि मीडिया में चल रही ‘कलह’ की खबरों पर भी विराम लगाने की कोशिश की है। OBC एडवाइजरी काउंसिल की इस बैठक के बहाने दोनों नेताओं का सहज अंदाज में दिखना यह संकेत देता है कि हाईकमान के दखल और आगामी चुनौतियों को देखते हुए दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ अब धीरे-धीरे पिघल रही है।

​बड़ी बात: “सियासत में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता। गहलोत और पायलट की यह मुस्कुराहट राजस्थान में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए नई ऊर्जा का संचार कर सकती है।”

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