उत्तराखंड के होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को बड़ी राहत: ऑफ-सीजन में बिजली बिल के ‘फिक्स्ड चार्ज’ से मिलेगी मुक्ति
उत्तराखंड के होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को बड़ी राहत: ऑफ-सीजन में बिजली बिल के ‘फिक्स्ड चार्ज’ से मिलेगी मुक्ति
देहरादून: उत्तराखंड सरकार और विद्युत नियामक आयोग ने पर्यटन उद्योग को मजबूती देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब राज्य के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को ‘ऑफ-सीजन’ के दौरान भारी-भरकम बिजली बिलों से राहत मिलेगी। इस योजना के तहत, सीजन न होने पर व्यवसायियों को बिजली के फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charge) में विशेष छूट दी जाएगी।
योजना की मुख्य शर्तें और लाभ
इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण मानक तय किए गए हैं:
10% बिजली खपत की शर्त: यदि कोई होटल या रेस्टोरेंट ऑफ-सीजन के दौरान अपने कुल स्वीकृत लोड का 10 फीसदी या उससे कम बिजली इस्तेमाल करता है, तभी वह फिक्स्ड चार्ज में छूट का पात्र होगा।
स्मार्ट मीटर अनिवार्य: योजना का लाभ लेने के लिए प्रतिष्ठान में स्मार्ट मीटर लगा होना अनिवार्य है, ताकि खपत का सटीक और पारदर्शी आंकलन हो सके।
आवेदन की समय सीमा: इच्छुक व्यवसायियों को 30 सितंबर तक इस योजना के लिए आवेदन करना होगा।
ऑफ-सीजन का समय
उत्तराखंड में 1 नवंबर से 31 मार्च तक की अवधि को ऑफ-सीजन माना जाता है। इस दौरान पहाड़ी क्षेत्रों और यात्रा मार्गों पर पर्यटकों की आवाजाही कम हो जाती है, जिससे कई छोटे-बड़े होटल या तो बंद हो जाते हैं या बहुत कम क्षमता पर चलते हैं।
स्मार्ट मीटर और रखरखाव के नियम
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने स्पष्ट किया है कि तकनीक और पारदर्शिता इस योजना की रीढ़ है:
त्वरित समाधान: यदि किसी उपभोक्ता का स्मार्ट मीटर खराब होता है, तो विभाग को उसे 10 दिनों के भीतर बदलना होगा।
पात्रता पर असर: मीटर खराब होने की स्थिति में यदि समय पर सुधार नहीं हुआ, तो उपभोक्ता छूट के लाभ से वंचित हो सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद के अनुसार:
”यह फायदा पूरे प्रदेश के संचालकों के लिए है, लेकिन मुख्य रूप से इसका लाभ उन छोटे होटलों और रेस्टोरेंट्स को मिलेगा जो यात्रा रूट या पहाड़ों पर सीजनल रूप से चलते हैं। यह कदम पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगा।”
इस पहल के बड़े फायदे
आर्थिक संबल: ऑफ-सीजन में कमाई कम होने पर फिक्स्ड चार्ज का बोझ न पड़ने से व्यापारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
ऊर्जा संरक्षण: कम खपत पर आर्थिक लाभ मिलने से लोग बिजली बचाने के प्रति जागरूक होंगे।
पारदर्शिता: स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ताओं और विभाग के बीच बिलिंग को लेकर विवाद कम होंगे।
निष्कर्ष: उत्तराखंड सरकार की यह पहल पर्यटन व्यवसायियों के लिए ‘संजीवनी’ की तरह है। पहली बार राज्य में वास्तविक इस्तेमाल के आधार पर आर्थिक राहत देने की ऐसी कोई योजना शुरू की गई है, जो आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
