’महावतार नरसिम्हा’ के बाद अब ‘परशुराम’ का आगमन: होम्बले फिल्म्स ने किया भारत के सबसे बड़े सिनेमैटिक यूनिवर्स का ऐलान
’महावतार नरसिम्हा’ के बाद अब ‘परशुराम’ का आगमन: होम्बले फिल्म्स ने किया भारत के सबसे बड़े सिनेमैटिक यूनिवर्स का ऐलान
मुंबई: ‘KGF’, ‘कांतारा’ और ‘सालार’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले होम्बले फिल्म्स ने एक बार फिर भारतीय सिनेमा में हलचल मचा दी है। ‘महावतार नरसिम्हा’ की अपार सफलता के बाद, मेकर्स ने अब ‘महावतार परशुराम’ का पहला आधिकारिक पोस्टर जारी कर दिया है। यह फिल्म सात भागों वाले भव्य ‘महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स’ की दूसरी बड़ी किस्त होने वाली है।
”जहाँ धैर्य समाप्त होता है, वहां परशुराम का फरसा शुरू होता है!”
फिल्म के पहले लुक के साथ दी गई यह टैगलाइन दर्शकों के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। अश्विन कुमार के निर्देशन में बन रही यह फिल्म भगवान विष्णु के छठे अवतार, परशुराम की गाथा को बड़े पर्दे पर जीवंत करेगी। कहानी में दिखाया जाएगा कि कैसे उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए उन अहंकारी और भ्रष्ट राजाओं का संहार किया, जो मानवता के लिए खतरा बन गए थे।
जब थिएटर बन गए थे मंदिर
’महावतार नरसिम्हा’ के दौरान देश भर में एक अलग ही सांस्कृतिक लहर देखी गई थी। सिनेमा हॉल के बाहर लोगों का जूते उतारकर भजन-कीर्तन करना और थिएटर को मंदिर की तरह सम्मान देना इस बात का प्रमाण था कि दर्शक अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों के लिए कितने भावुक हैं। अब ‘परशुराम’ के साथ इस सफर को एक नए विजुअल स्तर पर ले जाने की तैयारी है।
मेकर्स का क्या है कहना?
प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए प्रोड्यूसर विजय किरागांदुर ने कहा:
”हमारी कहानियाँ ही हमारी असली ताकत हैं। ‘महावतार परशुराम’ के जरिए हमारा लक्ष्य आज की पीढ़ी को अपनी विरासत और जड़ों की शक्ति से परिचित कराना है। यह फिल्म साहस, शक्ति और उद्देश्य की एक महागाथा होगी।”
क्यों खास है यह फिल्म?
एनीमेशन और विजुअल स्पेक्टेकल: फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्राफिक्स और बेहतरीन संगीत के साथ पेश किया जाएगा।
सांस्कृतिक जुड़ाव: ‘रामायण’ और ‘कल्कि 2898 AD’ जैसी फिल्मों की तरह यह भी भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक सिनेमाई रूप देगी।
होम्बले फिल्म्स का भरोसा: कलीम प्रोडक्शन और होम्बले फिल्म्स की साझेदारी इस प्रोजेक्ट को देश की सबसे बड़ी फिल्मों की कतार में खड़ा करती है।
होम्बले फिल्म्स की यह नई पेशकश न केवल मनोरंजन, बल्कि भारतीय संस्कृति और धर्म के प्रति एक बड़े सिनेमाई सम्मान के रूप में देखी जा रही है। अब पूरे देश की निगाहें परशुराम के उस न्यायकारी ‘फरसे’ पर टिकी हैं, जो बड़े पर्दे पर धर्म की स्थापना करेगा।
