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ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव: वैश्विक तेल बाजार में ‘महा-संकट’, $120 के पार कच्चा तेल

ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव: वैश्विक तेल बाजार में ‘महा-संकट’, $120 के पार कच्चा तेल

​मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट है। ईरान द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को आंशिक रूप से बाधित करने के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है।

​बाजार की ताजा स्थिति: कीमतों में आग

​युद्ध की आहट और सप्लाई चेन टूटने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें आसमान छू रही हैं:

​मार्च 2026 की शुरुआत में तेल $80 के करीब था, जो अब $120 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है।

​खाड़ी देशों से होने वाला निर्यात लगभग 20% तक गिर गया है।

​कतर (Qatar) जैसे देशों ने गैस (LNG) निर्यात पर ‘फोर्स मेजर’ (आकस्मिक संकट) लागू कर दिया है, जिससे बिजली संकट का खतरा भी बढ़ गया है।

​हॉर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की ‘लाइफलाइन’ पर संकट

​ईरान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की चेतावनी दी है। ज्ञात हो कि दुनिया का एक-पांचवां (20%) कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इस रास्ते के बंद होने का मतलब है कि सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई का तेल बाजार तक नहीं पहुंच पाएगा।

​भारत और एशिया पर सीधा प्रहार

​एशियाई देश, विशेषकर भारत, चीन और जापान अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भर हैं।

​भारत में असर: भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की कीमत $150 प्रति बैरल तक पहुंचने की खबरें हैं, जिसके कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि की संभावना है।

​महंगाई का डर: ईंधन की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे खाने-पीने की चीजों और आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं।

​क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

​अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख के अनुसार, “यह वर्तमान इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा सुरक्षा चुनौती है।” वहीं, IMF ने चेतावनी दी है कि यदि यह तनाव जारी रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था ‘स्टैगफ्लेशन’ (Stagflation) का शिकार हो सकती है, जहां विकास दर रुक जाएगी और महंगाई बेकाबू होगी।

​मुख्य बिंदु:

​स्टॉक मार्केट में गिरावट: ऊर्जा क्षेत्र को छोड़कर दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी जा रही है।

​अमेरिका का रुख: जो बाइडन प्रशासन अपने सामरिक तेल भंडार (SPR) से तेल निकालने पर विचार कर रहा है ताकि कीमतों को स्थिर किया जा सके।

​युद्ध का दायरा: इजरायल और ईरान द्वारा एक-दूसरे के तेल ठिकानों को निशाना बनाने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।

​वैश्विक शक्तियां अब कूटनीतिक रास्तों से इस तनाव को कम करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन फिलहाल तेल की कीमतें कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

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