लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरा: दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला, 298 वोट पक्ष में, 352 की जरूरत – 230 विपक्ष में
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरा: दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला, 298 वोट पक्ष में, 352 की जरूरत – 230 विपक्ष में
नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026: संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (महिला आरक्षण बिल के संशोधन वाला) भारी विवाद के बाद गिर गया। बिल को पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट जरूरी थे, लेकिन पक्ष में केवल 298 वोट पड़े, जबकि 230 वोट विरोध में गए। कुल 528 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया।
यह बिल 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संशोधित करके 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 33% महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने (परिसीमन के साथ) से जुड़ा था। सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम बता रही थी, जबकि विपक्ष ने इसे परिसीमन के जरिए दक्षिण भारत और छोटे राज्यों की राजनीतिक ताकत कम करने की साजिश करार दिया।
वोटिंग का परिणाम
पक्ष में (Ayes): 298 वोट (मुख्यतः NDA)
विरोध में (Noes): 230 वोट (INDIA गठबंधन और अन्य विपक्षी दल)
दो-तिहाई बहुमत की कमी: 54 वोट कम पड़े
स्पीकर ओम बिरला ने वोटिंग के बाद बिल के गिरने की घोषणा की, जिसके बाद सदन में हंगामा हुआ।
प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रियाएं
राहुल गांधी (कांग्रेस): बिल को “चुनावी नक्शा बदलने की साजिश” बताया। कहा कि सरकार दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों की सीटें कम करके उत्तरी राज्यों को फायदा पहुंचाना चाहती है। विपक्ष ने इसे हर हाल में रोकने का फैसला किया था।
अमित शाह (गृह मंत्री): विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे महिला आरक्षण का सीधा विरोध नहीं कर रहे, लेकिन “ifs and buts” लगाकर बिल को रोक रहे हैं। दक्षिण राज्यों को कोई नुकसान नहीं होने का आश्वासन दिया, लेकिन विपक्ष नहीं माना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: सर्वसम्मति की अपील की थी। कहा कि यह महिलाओं और लोकतंत्र के लिए है, लेकिन विपक्ष ने “शर्तों” के साथ विरोध किया।
मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेता: परिसीमन को संघीय ढांचे पर हमला बताया। जाति जनगणना से जोड़कर सवाल उठाए।
सरकार के पास लोकसभा में सामान्य बहुमत तो है, लेकिन संवैधानिक संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, जो NDA नहीं जुटा पाया। कुछ सहयोगी दलों (जैसे TDP आदि) की अनिश्चितता या अनुपस्थिति भी वजह बताई जा रही है।
क्या होगा आगे?
बिल लोकसभा में गिरने के बाद अब राज्यसभा में भी नहीं जा सकेगा।
सरकार को या तो नए सिरे से कोशिश करनी होगी या विपक्ष से समझौता करना होगा।
विपक्ष ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया, जबकि NDA ने कहा कि महिला आरक्षण की मंशा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर मतभेद है।
यह घटना संसद में परिसीमन, जनगणना और महिला प्रतिनिधित्व को लेकर गहरे राजनीतिक विभाजन को उजागर करती है। विशेष सत्र अभी जारी है, लेकिन इस बिल के गिरने से 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की सरकार की योजना को बड़ा झटका लगा है।
(वोटिंग शाम को हुई। जांच और आगे की चर्चा जारी रह सकती है।)
