परिसीमन बिल पर संसद में गरमागरम चर्चा शुरू: विपक्ष का तीखा विरोध, सरकार बोली- कोई राज्य नहीं गंवाएगा सीट
परिसीमन बिल पर संसद में गरमागरम चर्चा शुरू: विपक्ष का तीखा विरोध, सरकार बोली- कोई राज्य नहीं गंवाएगा सीट
नई दिल्ली: संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र (16-18 अप्रैल 2026) की शुरुआत आज हुई, जिसमें परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और केंद्रशासित प्रदेशों से संबंधित संशोधन बिल पेश किए गए। इनका मुख्य उद्देश्य लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करना, नई जनगणना के आधार पर परिसीमन कराना और 33% महिला आरक्षण को 2029 लोकसभा चुनाव से पहले लागू करना है।
आज की चर्चा में क्या-क्या कहा गया (अभी तक का अपडेट):
सरकार का पक्ष: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बिल पेश करते हुए कहा कि यह महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने और लोकतंत्र को मजबूत करने का कदम है। सरकार ने आश्वासन दिया कि प्रो-राटा (आनुपातिक) आधार पर सभी राज्यों की सीटें बढ़ाई जाएंगी, किसी भी राज्य की एक भी लोकसभा सीट कम नहीं होगी। गृह मंत्री अमित शाह ने पहले भी कहा था कि दक्षिण के राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा।
विपक्ष का विरोध:
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने बिल को “असंवैधानिक” बताया और कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन की साजिश की जा रही है।
सपा के अखिलेश यादव और डीएमके के टीआर बालू ने भी जोरदार विरोध किया।
INDIA गठबंधन की बैठक में तय हुआ कि परिसीमन संबंधी प्रावधानों के खिलाफ एकजुट होकर वोटिंग की जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- “महिला आरक्षण का हम समर्थन करते हैं, लेकिन परिसीमन के जरिए दक्षिण भारत को कमजोर करने की कोशिश नहीं होने देंगे।”
लोकसभा में बिल पेश करने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें सरकार के पक्ष में 207 और विपक्ष में 126 वोट पड़े (कुछ रिपोर्ट्स में विरोध में 185 वोट बताए गए)। चर्चा 16-17 अप्रैल को 18 घंटे चलेगी, उसके बाद वोटिंग और 18 अप्रैल को राज्यसभा में चर्चा प्रस्तावित है।
बाहर का तीखा विरोध:
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने नामक्कल में परिसीमन बिल की कॉपी जला दी और काला झंडा लहराया। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ करार दिया और कहा- “यह तमिलों को उनकी ही जमीन पर शरणार्थी बनाने की साजिश है। यह आग पूरे द्रविड़ भूमि में फैलेगी और भाजपा के अहंकार को कुचल देगी।” उन्होंने 1950-60 के हिंदी विरोधी आंदोलन की याद दिलाई और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी और कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने भी दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व कम होने का खतरा बताया।
जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने INDIA गठबंधन से एकजुट रणनीति बनाने की अपील की।
परिसीमन बिल की मुख्य बातें:
लोकसभा सीटें ~850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव (राज्यों के लिए 815, केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 35)।
नई/ताजा जनगणना (या 2011 के आधार पर) के हिसाब से सीटों का पुनर्निर्धारण।
एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग (सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता में) का गठन।
दक्षिणी राज्यों का डर: जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों (तमिलनाडु, केरल, आंध्र, कर्नाटक) को उत्तर भारत (हिंदी बेल्ट) की तुलना में कम सीटें मिलने की आशंका।
सरकार का दावा: कोई राज्य नुकसान में नहीं आएगा, सीटें बढ़ाई जाएंगी।
विपक्ष का आरोप: उत्तर-दक्षिण विभाजन बढ़ेगा, संघीय ढांचा कमजोर होगा।
चर्चा अभी जारी है और अगले दो दिनों में और तेज होने की संभावना है। कई विपक्षी दल बिल को जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी को भेजने की मांग कर रहे हैं।
नोट: यह अपडेट 16 अप्रैल 2026 दोपहर तक की रिपोर्ट्स पर आधारित है। सदन की कार्यवाही और वोटिंग के साथ नई जानकारी आते ही स्थिति बदल सकती है।
अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक संसदीय वेबसाइट या विश्वसनीय समाचार स्रोत देखें।
क्या होगा आगे? क्या सरकार बिल पास करा लेगी या विपक्ष का विरोध सफल होगा – यह अगले दो दिनों में साफ होगा।
