अक्षय तृतीया: सोना महंगा है तो घर लाएं ये 5 शुभ चीजें
अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य या खरीदारी कभी क्षय (नष्ट) नहीं होती। अक्सर लोग इस दिन सोना खरीदने की योजना बनाते हैं, लेकिन सोने की आसमान छूती कीमतों के कारण हर किसी के लिए यह संभव नहीं होता।
शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, अगर आप सोना नहीं खरीद सकते, तो कुछ सस्ती और शुभ चीजें भी हैं जिन्हें घर लाने से मां लक्ष्मी की वैसी ही कृपा प्राप्त होती है।
अक्षय तृतीया: सोना महंगा है तो घर लाएं ये 5 शुभ चीजें
बिना ज्यादा खर्च किए आप इन वस्तुओं की खरीदारी कर अपने जीवन में समृद्धि ला सकते हैं:
1. जौ (Barley) – ‘स्वर्ण’ के समान फल
शास्त्रों में जौ को ‘कनक’ (सोने) के समान माना गया है। अक्षय तृतीया के दिन जौ खरीदना सबसे शुभ माना जाता है।
क्या करें: थोड़े से जौ खरीदकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें और बाद में इसे लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। यह सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
2. मिट्टी का कलश या घड़ा
गर्मी के मौसम में शीतल जल का दान महादान कहलाता है। इस दिन मिट्टी का नया घड़ा या कलश खरीदना बहुत शुभ होता है।
शुभ फल: कलश को घर लाकर उसमें पानी भरें और थोड़ा सा गुड़ या चीनी डालकर दान करें या घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखें। इससे मानसिक शांति और आर्थिक लाभ मिलता है।
3. दक्षिणावर्ती शंख या कौड़ी
मां लक्ष्मी को शंख और कौड़ियां अत्यंत प्रिय हैं।
सस्ता विकल्प: पीली कौड़ियां या एक छोटा दक्षिणावर्ती शंख बाजार में बहुत कम कीमत पर मिल जाता है। अक्षय तृतीया पर इन्हें खरीदकर पूजा स्थान पर रखने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।
4. सेंधा नमक
अगर बजट बहुत ही कम है, तो इस दिन सेंधा नमक खरीदना भी उत्तम माना जाता है।
क्यों खरीदें: ज्योतिष के अनुसार, नमक खरीदने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और दरिद्रता का नाश होता है।
5. हाथ का पंखा या खड़ाऊ (चप्पल)
अक्षय तृतीया वैशाख मास में आती है जब भीषण गर्मी होती है। इस समय दान की वस्तुओं को खरीदना श्रेष्ठ फलदायी होता है।
लाभ: मिट्टी का पात्र, हाथ का पंखा या चप्पल खरीदकर किसी जरूरतमंद को दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
अक्षय तृतीया पर खरीदारी का महत्व
”अक्षय” का अर्थ है जिसका कभी नाश न हो। इस दिन आप जो भी सात्विक और शुद्ध भाव से घर लाते हैं, वह आपके भाग्य में वृद्धि करता है। जरूरी नहीं कि वह वस्तु महंगी हो; श्रद्धा और परंपरा का पालन ही असली लक्ष्मी पूजन है।
