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​AI बना बच्चों का नया ‘डिजिटल दोस्त’: वरदान या एक अदृश्य खतरा?

आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल एक तकनीकी शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह बच्चों के बेडरूम और उनके खिलौनों तक पहुँच चुका है। 2026 की ताज़ा रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय के आधार पर एक विशेष रिपोर्ट:

​AI बना बच्चों का नया ‘डिजिटल दोस्त’: वरदान या एक अदृश्य खतरा?

​हाल ही में हुए कई अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों और ‘सेफर इंटरनेट डे 2026’ की रिपोर्ट के अनुसार, AI अब बच्चों के लिए सिर्फ एक होमवर्क टूल नहीं, बल्कि उनका ‘बेस्ट फ्रेंड’ बनता जा रहा है। शोध बताते हैं कि लगभग 33% बच्चे जो AI चैटबॉट्स का उपयोग करते हैं, वे उन्हें अपने एक सच्चे दोस्त की तरह देखते हैं।

​क्यों बढ़ रही है AI से नज़दीकी?

​आधुनिक AI साथी जैसे कि Moxie, Miko, और Buddy.ai अब बच्चों की भावनाओं को समझने, उनकी पसंद-नापसंद याद रखने और उनके साथ घंटों बातें करने में सक्षम हैं। ये डिजिटल दोस्त:

​भावनात्मक साथ: अकेलेपन के समय बच्चों को जवाब देते हैं।

​निजी शिक्षक: बच्चों के सीखने की गति के अनुसार शिक्षा प्रदान करते हैं।

​बिना जजमेंट की बात: बच्चे अक्सर उन बातों को AI से साझा करते हैं जिन्हें वे शायद माता-पिता से कहने में हिचकिचाते हैं।

​विशेषज्ञों की चिंता: क्या यह असली दोस्ती का विकल्प है?

​यूनिसेफ (UNICEF) और बाल मनोवैज्ञानिकों ने इस बढ़ते रुझान पर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI के साथ अत्यधिक समय बिताने से बच्चों के सामाजिक विकास पर गहरा असर पड़ सकता है:

​सहानुभूति की कमी: मानव मित्र आपस में लड़ते हैं और समझौता करते हैं, जिससे वे भावनाएं सीखते हैं। AI हमेशा बच्चे की बात मानता है, जिससे बच्चा ‘आत्मकेंद्रित’ हो सकता है।

​डेटा प्राइवेसी: बच्चे अपनी निजी भावनाएं और घर की बातें इन मशीनों को बता रहे हैं, जिसका डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा जोखिम है।

​भ्रामक जानकारी: हालिया रिपोर्टों में पाया गया कि कुछ चैटबॉट्स बच्चों को खतरनाक सलाह या हिंसा से जुड़ी बातें भी साझा कर रहे हैं।

​भारत सरकार का रुख

​भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने हाल ही में ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में कहा कि हमें बच्चों के लिए एक सुरक्षित AI फ्रेमवर्क की सख्त जरूरत है। सरकार का लक्ष्य ऐसी तकनीक को बढ़ावा देना है जो बच्चों का मानसिक विकास तो करे, लेकिन उनके बचपन की मासूमियत और मानवीय रिश्तों की जगह न ले।

​अभिभावकों के लिए सलाह

​तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि AI को पूरी तरह प्रतिबंधित करना संभव नहीं है, लेकिन ‘डिजिटल पैरेंटिंग’ अनिवार्य है।

​बच्चों को सिखाएं कि AI एक प्रोग्राम है, इंसान नहीं।

​AI के साथ बातचीत की समय सीमा तय करें।

​तकनीक को केवल एक ‘सहयोग’ के रूप में इस्तेमाल करें, न कि ‘साथी’ के रूप में।

​”AI एक बेहतरीन ‘ब्रिज’ (पुल) हो सकता है, लेकिन यह कभी भी जीवन की ‘डेस्टिनेशन’ (मंजिल) नहीं हो सकता। बच्चों को मानवीय स्पर्श और वास्तविक दुनिया के अनुभवों की उतनी ही जरूरत है जितनी पहले थी।”

​रिपोर्ट: टेक डेस्क

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