होर्मुज में महायुद्ध की आहट: ट्रंप की नाकाबंदी के बाद ईरान ने तानी मिसाइलें, चीन की एंट्री से दुनिया में हड़कंप
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) का नक्शा आज एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। पिछले 24 घंटों में जिस तरह की बयानबाजी और सैन्य तैनाती हुई है, उसने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं से भर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) की पूर्ण नाकाबंदी के आदेश ने वैश्विक कूटनीति में भूचाल ला दिया है।
1. ट्रंप का ‘ऑपरेशन आयरन गेट’: नाकाबंदी का पूरा सच
आज सुबह वाशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े सैन्य एक्शन का ऐलान किया। उन्होंने इसे ‘ऑपरेशन आयरन गेट’ का नाम दिया है।
मुख्य बिंदु:
पूर्ण प्रतिबंध: ट्रंप ने कहा कि अब कोई भी ईरानी जहाज या ईरान को तेल ले जाने वाला टैंकर होर्मुज की सीमा पार नहीं करेगा।
सैन्य आदेश: अमेरिकी पांचवें बेड़े (5th Fleet) को ‘शूट-टू-किल’ के आदेश दिए गए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरानी नौसेना की ओर से कोई भी उकसावा हुआ, तो अमेरिकी नौसेना उसे मटियामेट करने में संकोच नहीं करेगी।
वार्ता की विफलता: यह फैसला इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बुरी तरह विफल होने के बाद आया है। अमेरिका का दावा है कि ईरान परमाणु समझौते की आड़ में खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है।
2. ईरान की आक्रामक मुद्रा: ‘जलडमरूमध्य बनेगा कब्रगाह’
जैसे ही वाशिंगटन से नाकाबंदी की खबर आई, तेहरान की सड़कों पर तनाव बढ़ गया। ईरान के सर्वोच्च नेता और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने तुरंत एक आपातकालीन बैठक बुलाई।
ईरान का पलटवार:
आत्मघाती हमले की धमकी: ईरान ने चेतावनी दी है कि उनके पास ‘हजारों की संख्या में सुसाइड ड्रोन और मिसाइलें’ तैनात हैं। यदि उनकी समुद्री सीमा को चुनौती दी गई, तो वे होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के लिए बंद कर देंगे।
आर्थिक युद्ध: ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि “अगर हम अपना तेल नहीं बेच पाएंगे, तो दुनिया का कोई भी देश इस रास्ते से तेल नहीं ले जा पाएगा।”
सैन्य तैयारी: ईरान ने अपनी ‘फतेह’ श्रेणी की पनडुब्बियों को गहरे समुद्र में तैनात कर दिया है और तटीय इलाकों में ‘मोजिर-6’ ड्रोन की निगरानी बढ़ा दी है।
3. चीन का दखल: ‘ड्रैगन’ ने दी अमेरिका को ललकार
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब चीन खुलकर ईरान के समर्थन में उतर आया। बीजिंग के लिए होर्मुज का रास्ता उसकी लाइफलाइन है, क्योंकि चीन का 60% कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है।
चीन का रुख:
नौसैनिक हस्तक्षेप के संकेत: चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, चीनी नौसेना के दो डिस्ट्रॉयर (Destroyers) पहले से ही ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहे हैं।
आर्थिक चोट: चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि व्यापार मार्ग में बाधा डाली गई, तो वह अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स की बिक्री शुरू कर देगा, जिससे अमेरिकी डॉलर को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
4. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ‘तेल का झटका’
होर्मुज की नाकाबंदी की खबर का असर सीधे पेट्रोल पंपों और शेयर बाजारों पर पड़ा है।
क्रूड ऑयल का धमाका: आज दोपहर तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नाकाबंदी 48 घंटे से ज्यादा चली, तो कीमतें 150 डॉलर को पार कर सकती हैं।
शेयर बाजार धड़ाम: वॉल स्ट्रीट से लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) तक, हर तरफ लाल निशान दिखाई दे रहा है। निवेशकों को डर है कि युद्ध की स्थिति में वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह टूट जाएगी।
5. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना खास?
आम जनता के लिए यह समझना जरूरी है कि यह छोटा सा समुद्री रास्ता इतना महत्वपूर्ण क्यों है।
यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है।
दुनिया का लगभग 21% तेल और एक-तिहाई एलएनजी (LNG) इसी 33 किलोमीटर चौड़े रास्ते से गुजरता है।
यदि यह रास्ता बंद होता है, तो सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देशों का व्यापार ठप हो जाएगा।
6. रूस और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
रूस ने इस मामले में अमेरिका को ‘आग से न खेलने’ की सलाह दी है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) ने कहा कि वे इस क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि भारत के लाखों नागरिक खाड़ी देशों में रहते हैं और वहां से आने वाला तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
ताजा अपडेट (Last Hour Updates):
मिसाइल अलर्ट: खबर है कि ईरान ने होर्मुज के पास अपने भूमिगत मिसाइल अड्डों के कपाट खोल दिए हैं।
अमेरिकी कैरियर: यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) युद्धपोत को होर्मुज के मुहाने पर पोजीशन लेने के लिए कहा गया है।
यूएन की बैठक: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने आज रात न्यूयॉर्क में एक आपातकालीन सत्र बुलाया है।
निष्कर्ष:
आज की स्थिति बेहद नाजुक है। यह केवल दो देशों का विवाद नहीं, बल्कि एक वैश्विक ऊर्जा युद्ध में तब्दील होता दिख रहा है। अगले 24 घंटे यह तय करेंगे कि दुनिया एक नई मंदी की ओर जाएगी या कूटनीति के जरिए इस बारूदी सुरंग को हटाया जा सकेगा।
