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​UPI पेमेंट्स में 1 घंटे की देरी! RBI का नया प्रस्ताव: अब ₹10,000 से ऊपर के ट्रांसफर पर लगेगा ‘ब्रेक

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल धोखाधड़ी पर नकेल कसने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। यदि यह नियम लागू होता है, तो UPI और IMPS के जरिए किए जाने वाले बड़े ट्रांजेक्शन अब ‘इंस्टेंट’ नहीं रहेंगे।

​UPI पेमेंट्स में 1 घंटे की देरी! RBI का नया प्रस्ताव: अब ₹10,000 से ऊपर के ट्रांसफर पर लगेगा ‘ब्रेक

​मुंबई/नई दिल्ली: भारत में हर दिन करोड़ों लोग UPI का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब इसके इस्तेमाल का तरीका बदलने वाला है। बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ स्कैम्स को रोकने के लिए RBI ने एक डिस्कशन पेपर जारी किया है, जिसमें ट्रांजेक्शन पर 1 घंटे का कूलिंग-ऑफ पीरियड (Cooling-off Period) लागू करने का सुझाव दिया गया है।

​1. क्या है ‘1 घंटे की देरी’ वाला नया नियम?

​प्रस्ताव के अनुसार, यदि आप किसी व्यक्ति (P2P) को ₹10,000 से अधिक की राशि ट्रांसफर करते हैं, तो वह पैसा तुरंत प्राप्तकर्ता के खाते में नहीं पहुँचेगा।

​प्रोसेस: पैसा आपके खाते से तुरंत कट जाएगा, लेकिन बैंक इसे 1 घंटे तक होल्ड पर रखेगा।

​कैंसिलेशन का मौका: इस 1 घंटे की खिड़की (Window) के दौरान, यदि भेजने वाले को एहसास होता है कि वह किसी धोखाधड़ी का शिकार हुआ है या उसने गलत खाते में पैसे भेज दिए हैं, तो वह ट्रांजेक्शन को कैंसिल कर सकेगा।

​2. क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत?

​RBI के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के कारण नुकसान ₹22,000 करोड़ के पार पहुँच गया है।

​टार्गेट: ₹10,000 से ऊपर के ट्रांजेक्शन कुल धोखाधड़ी के मामलों का करीब 45% हिस्सा हैं, लेकिन कुल चोरी हुए पैसे (Value) में इनकी हिस्सेदारी 98.5% है।

​मनोवैज्ञानिक दबाव: धोखेबाज अक्सर पीड़ित पर जल्दबाजी में पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं। 1 घंटे की देरी से यूजर को सोचने और मामले को समझने का समय मिलेगा।

​3. क्या दुकानदार को पेमेंट करने में भी होगी देरी?

​आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि यह नियम सभी ट्रांजेक्शन पर लागू नहीं होगा:

​मर्चेंट पेमेंट (P2M): यदि आप किसी दुकान पर QR कोड स्कैन करके पेमेंट करते हैं या ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो वह पहले की तरह इंस्टेंट (तुरंत) होगा।

​व्हाइटलिस्टिंग: आप अपने भरोसेमंद संपर्कों (जैसे परिवार के सदस्य) को ‘व्हाइटलिस्ट’ कर सकेंगे, जिन्हें पैसे भेजने पर कोई देरी नहीं होगी।

​4. बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा

​RBI ने 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए ₹50,000 से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर “ट्रस्टेड पर्सन” (Trusted Person) की मंजूरी अनिवार्य करने का भी सुझाव दिया है।

​वर्तमान स्थिति: यह फिलहाल एक प्रस्ताव है जिस पर RBI ने 8 मई 2026 तक जनता और हितधारकों से फीडबैक मांगा है। फीडबैक की समीक्षा के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

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