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अमेरिका-ईरान तनाव में विश्व बैंक की बड़ी चेतावनी: ‘अभी तो और बुरा होना बाकी है’

अमेरिका-ईरान तनाव में विश्व बैंक की बड़ी चेतावनी: ‘अभी तो और बुरा होना बाकी है’

वाशिंगटन/इस्लामाबाद, 12 अप्रैल 2026: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा हालिया शांति वार्ता के फेल होने के बीच विश्व बैंक ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने कहा कि मध्य पूर्व युद्ध (अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान) के आर्थिक प्रभाव अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं और युद्ध समाप्त होने के बाद स्थिति और भी खराब हो सकती है।

विश्व बैंक के अनुसार, हॉर्मुज़ स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद रहने, तेल आपूर्ति में 6-8 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी और बुनियादी ढांचे के नुकसान से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर cascading प्रभाव पड़ रहा है। भले ही नाजुक युद्धविराम कायम रहे, फिर भी विकासशील देशों में वृद्धि दर कम होगी और मुद्रास्फीति बढ़ेगी।

विश्व बैंक की मुख्य चेतावनियां:

वैश्विक विकास दर पर 0.3 से 0.4 प्रतिशत अंक का नकारात्मक प्रभाव (बेसलाइन परिदृश्य में)। यदि संघर्ष लंबा चला तो यह 1 प्रतिशत अंक तक पहुंच सकता है।

उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि 2026 में 3.65% रहने का अनुमान (पहले 4% था)। प्रतिकूल स्थिति में यह 2.6% तक गिर सकती है।

मुद्रास्फीति 200-300 आधार अंक बढ़ सकती है; लंबे युद्ध में 0.9 प्रतिशत अंक तक। विकासशील देशों में मुद्रास्फीति 4.9% तक पहुंचने का अनुमान (पहले 3% था), जो 6.7% तक जा सकती है।

तेल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं, जिससे मुद्रास्फीति, रोजगार और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ रहा है।

अजय बंगा ने कहा, “हम अत्यधिक चिंतित हैं कि इस युद्ध का मुद्रास्फीति, नौकरियों और खाद्य सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।” विश्व बैंक ने प्रभावित देशों को तुरंत 20-25 बिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी की है और यदि जरूरत पड़ी तो 50-60 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने की भी योजना है। IMF, विश्व बैंक और IEA ने संयुक्त रूप से इस संकट का सामना करने के लिए समन्वय शुरू कर दिया है।

ईरान-अमेरिका वार्ता के असफल होने के बाद क्षेत्रीय तनाव बरकरार है। हॉर्मुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर गहरी असहमति बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि युद्धविराम टिका नहीं तो तेल की कीमतें 140-157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा।

विश्व बैंक ने सभी देशों से आग्रह किया है कि वे ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और वित्तीय स्थिरता के लिए तत्काल कदम उठाएं। विशेष रूप से विकासशील देशों में गरीबों पर पड़ने वाले असर को कम करने की जरूरत है।

यह तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए नया झटका साबित हो रहा है। आगे की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

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