PCPNDT एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई: 9 अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापेमारी, रेडियोलॉजिस्ट न मिलने पर दो मशीनें सील
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की मुस्तैदी से लिंग चयन जैसी कुरीतियों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देश पर हुई इस छापेमारी से अवैध गतिविधियों में संलिप्त केंद्रों के बीच हड़कंप मच गया है।
PCPNDT एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई: 9 अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापेमारी, रेडियोलॉजिस्ट न मिलने पर दो मशीनें सील
1. संयुक्त टीम का औचक निरीक्षण
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके अग्रवाल के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम ने क्षेत्र के 9 अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक छापेमारी की।
नेतृत्व: इस अभियान का नेतृत्व नोडल अधिकारी डॉ. एसपी सिंह और प्रभारी नायब तहसीलदार राधेश्याम राणा ने किया।
जांच का दायरा: टीम ने केंद्रों में अभिलेखों (Records), फॉर्म-F के रखरखाव, मरीजों के दस्तावेजों और वैधानिक सूचनाओं की उपलब्धता की गहनता से जांच की।
2. नियमों का उल्लंघन और मशीनों की सीलिंग
निरीक्षण के दौरान एक अस्पताल में गंभीर लापरवाही पाई गई, जिसके बाद सख्त कदम उठाए गए:
रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति: अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें तो थीं, लेकिन मौके पर कोई अधिकृत रेडियोलॉजिस्ट मौजूद नहीं था।
तत्काल कार्रवाई: पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के नियमों के उल्लंघन के चलते टीम ने दोनों मशीनों को मौके पर ही सील कर दिया।
सख्त निर्देश: प्रबंधन को चेतावनी दी गई है कि बिना विशेषज्ञ की उपस्थिति के मशीनों का संचालन कतई नहीं किया जाएगा।
3. कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने इस कार्रवाई के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा:
मुख्य लक्ष्य: समाज से कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराई को जड़ से खत्म करना और लिंग जांच पर पूरी तरह रोक लगाना।
कानूनी प्रावधान: लिंग जांच करना और करवाना दोनों ही कानूनन अपराध हैं, जिसके लिए भारी जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है।
4. स्वास्थ्य संस्थानों को सख्त संदेश
प्रशासन की इस सक्रियता ने अन्य डायग्नोस्टिक केंद्रों को भी कड़ा संदेश दिया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि:
नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।
भविष्य में भी इसी तरह के औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) जारी रहेंगे।
सभी केंद्रों को फॉर्म-F और मरीजों के डेटा को पारदर्शी तरीके से अपडेट रखना अनिवार्य है।
प्रशासनिक टीम में शामिल सदस्य: लेखपाल अमित पांडे, सामाजिक विशेषज्ञ बिंदु वासिनी, जिला समन्वयक प्रदीप महर और अधिशासी सहायक गोपाल आर्य।
निष्कर्ष: यह कार्रवाई न केवल नियमों के पालन को सुनिश्चित करती है, बल्कि सामाजिक न्याय और लिंग समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। क्षेत्र के सभी नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।
