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अमेरिका-ईरान के बीच थमी जंग: ऐतिहासिक शांति समझौते पर बनी सहमति, पीएम मोदी ने किया स्वागत

अमेरिका-ईरान के बीच थमी जंग: ऐतिहासिक शांति समझौते पर बनी सहमति, पीएम मोदी ने किया स्वागत

​वॉशिंगटन / तेहरान / नई दिल्ली:

दुनिया पर मंडरा रहा एक बहुत बड़ा युद्ध संकट अब टलने की कगार पर है। लंबे समय से चल रहे टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जंग थम गई है और दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते (सीजफायर डील) का ऐलान कर दिया है।

​व्हाइट हाउस से ‘सफेद धुआं’ देखा गया है, जो इस बात की आधिकारिक पुष्टि (कन्फर्मेशन) है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बन चुकी है। आगामी 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस पीस डील पर दोनों देशों के शीर्ष नेता हस्ताक्षर करेंगे।

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया समझौते का स्वागत

​भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शांति समझौते का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर लिखा:

​”मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक उथल-पुथल हुई है और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है।”

​पीएम मोदी ने आगे उम्मीद जताई कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी, जिससे समुद्री आवाजाही और वैश्विक व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सकेगी।

​राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान ने किया डील का दावा

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस बड़ी कामयाबी की घोषणा की। वहीं, ईरानी प्रशासन ने भी बयान जारी कर बताया कि अमेरिका के साथ कई महीनों की लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद दोनों देशों ने सीजफायर के MoU (Memorandum of Understanding) को अंतिम रूप दे दिया है।

​समझौते की मुख्य बातें:

​होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा: राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए फिर से खोला जाएगा।

​नौसैनिक नाकेबंदी खत्म: ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी दे दी गई है।

​14 शर्तों पर सहमति: दोनों देश कुल 14 शर्तों पर राजी हुए हैं।

​47 साल बाद होगी पहली हाई-लेवल मीटिंग

​अगर 19 जून को जेनेवा में यह पीस डील साइन हो जाती है, तो पिछले 47 सालों में तेहरान (ईरान) और वॉशिंगटन (अमेरिका) के बीच यह पहली उच्च स्तरीय (High-Level) बैठक होगी।

​ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि शांति समझौता बनाए रखने के लिए अमेरिका को तत्काल तीन मुख्य कदम उठाने होंगे:

​नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह खत्म की जाए।

​युद्ध और सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाइयों को रोका जाए।

​ईरान के फ्रीज किए गए (रोके गए) फंड को तुरंत रिलीज किया जाए।

​तेल से पाबंदियां हटाने और फंड जारी करने की शर्त

​ईरानी मीडिया के अनुसार, 14 शर्तों के तहत अंतिम दौर की बातचीत तब तक औपचारिक रूप से शुरू नहीं होगी, जब तक अमेरिका ईरान के 12 अरब डॉलर का फंड जारी नहीं कर देता। इसके साथ ही ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों और आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त करना होगा।

​इस समझौते से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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