उत्तराखंड

​चारधाम यात्रा 2026: ‘एयर रेस्क्यू’ पर सरकार का विशेष फोकस, आपदा से निपटने के लिए हेलीकॉप्टर स्टैंडबाय पर

आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में है। शुक्रवार को राज्य भर में आयोजित मेगा मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा प्रबंधन की तैयारियों, विशेषकर हेली रेस्क्यू ऑपरेशंस को परखा गया।

​चारधाम यात्रा 2026: ‘एयर रेस्क्यू’ पर सरकार का विशेष फोकस, आपदा से निपटने के लिए हेलीकॉप्टर स्टैंडबाय पर

​1. आपदा प्रबंधन का ‘ब्रह्मास्त्र’: हेली सेवाएं

​उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि आपदा के समय जीवनरक्षक (Lifeline) साबित हुए हैं।

​अहम भूमिका: पिछले साल की धराली आपदा में हेलीकॉप्टरों ने करीब 5,000 लोगों को एयरलिफ्ट किया था।

​स्टैंडबाय हेलीकॉप्टर: UCADA (उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी) ने इस बार एक हेलीकॉप्टर को विशेष रूप से आपात स्थितियों और मेडिकल इमरजेंसी के लिए ‘स्टैंडबाय’ पर रखा है, जो ऋषिकेश एम्स तक मरीजों को पहुंचाने में मदद करेगा।

​डिजास्टर रिलीफ सेवा: निजी कंपनी ‘विक्रांत एविएशन’ के सहयोग से यह सेवा संचालित है, जिसका 60% खर्च आपदा प्रबंधन विभाग और 40% UCADA उठाता है।

​2. राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल: केदारनाथ से लेकर मैदानी इलाकों तक

​शुक्रवार को आयोजित मॉक ड्रिल में NDMA, NDRF, SDRF, ITBP और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।

​हवाई रेस्क्यू का अभ्यास: केदारनाथ धाम और चीड़बासा हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से फंसे हुए यात्रियों को निकालने का अभ्यास किया गया।

​विभिन्न आपदा परिदृश्य: * चीड़बासा में बादल फटने (Cloudburst) और फ्लैश फ्लड की स्थिति।

​सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर भूस्खलन (Landslide)।

​गुप्तकाशी-केदारनाथ मार्ग पर खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर लापता होने की स्थिति।

​केदारनाथ मंदिर क्षेत्र में भारी बर्फबारी और रेड अलर्ट के दौरान राहत कार्य।

​भीड़ नियंत्रण: केदारनाथ हेलीपैड पर आपातकालीन लैंडिंग के समय भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाए, इसका भी सफल परीक्षण हुआ।

​3. जमीन पर सुरक्षा और स्वास्थ्य की जांच

​मॉक ड्रिल केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मैदानी इलाकों और अस्पतालों की व्यवस्थाओं को भी परखा गया:

​नदी प्रबंधन: रिस्पना नदी में बाढ़ आने की स्थिति में सपेरा बस्ती क्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया का अभ्यास किया गया।

​स्वास्थ्य सेवा (Coronation Hospital): मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने पर ‘ट्रायेज सिस्टम’ और ऑक्सीजन सपोर्ट की उपलब्धता जांची गई।

​सहस्त्रधारा हेलीपैड: मेजर जनरल सुधीर बहल (NDMA) ने यहाँ कंट्रोल रूम, वेदर मॉनिटरिंग और SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) का बारीकी से निरीक्षण किया।

​4. प्रशासन का रुख: “रिस्पॉन्स टाइम कम करना लक्ष्य”

​रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सात चिन्हित स्थानों पर हुई मॉक ड्रिल के बाद आश्वस्त किया:

​कमियों में सुधार: मॉक ड्रिल के दौरान जो छोटी कमियां सामने आई हैं, उन्हें यात्रा शुरू होने से पहले ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।

​तत्परता: शासन का लक्ष्य है कि किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशासन का ‘रिस्पॉन्स टाइम’ न्यूनतम हो ताकि जान-माल का नुकसान कम से कम हो।

​मुख्य संदेश: उत्तराखंड सरकार का संदेश साफ है—चाहे आसमान हो या जमीन, चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। आधुनिक तकनीक और बेहतर समन्वय के साथ इस बार की यात्रा को ‘जीरो एरर’ (Zero Error) बनाने की कोशिश की जा रही है।

​यात्रियों के लिए सलाह: यात्रा के दौरान मौसम की जानकारी लेते रहें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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