हिमालय की शान ‘मोनाल’ का दारमा घाटी में दीदार: 10,000 फीट की ऊंचाई पर कैमरे में कैद हुई दुर्लभ खूबसूरती
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र दारमा घाटी से प्रकृति प्रेमियों के लिए एक सुखद खबर सामने आई है। यहाँ की चोटियों पर बर्फबारी के बीच उत्तराखंड के राज्य पक्षी ‘हिमालयन मोनाल’ का दुर्लभ दीदार हुआ है। अपने सतरंगी और चमकदार पंखों के लिए प्रसिद्ध इस पक्षी को ‘हिमालय की शान’ भी कहा जाता है।
हिमालय की शान ‘मोनाल’ का दारमा घाटी में दीदार: 10,000 फीट की ऊंचाई पर कैमरे में कैद हुई दुर्लभ खूबसूरती
1. 10 हजार फीट की ऊंचाई पर दिखा राज्य पक्षी
पिथौरागढ़ जनपद की दारमा घाटी में स्थित बालिंग गांव के पास लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई वाली चोटी पर मोनाल पक्षी नजर आया।
भोजन की तलाश: स्थानीय लोगों के अनुसार, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाल ही में हुई भारी बर्फबारी के कारण ये पक्षी भोजन की तलाश में निचली चोटियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इनके दर्शन आसान हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी: होम स्टे संचालक गुड्डू जंग ने इस खूबसूरत पक्षी को उस समय देखा जब वे धारचूला की ओर आ रहे थे। उनके अनुसार, कड़ाके की ठंड और बर्फ के बीच मोनाल का दिखना एक सुखद अनुभव रहा।
2. मौसम के बदलते मिजाज का असर
पिछले कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों के मौसम चक्र में बदलाव देखा गया है:
देरी से बर्फबारी: आमतौर पर नवंबर से मार्च तक होने वाली बर्फबारी अब खिसक कर अप्रैल तक पहुंच गई है।
सूखे जैसे हालात: पिछले एक दशक से नवंबर-जनवरी के दौरान सूखा रहने लगा है, लेकिन इस साल अप्रैल में हुई भारी हिमपात ने पूरी घाटी को सफेद चादर से ढक दिया है। इसी ठंड और बर्फबारी ने मोनाल जैसे दुर्लभ पक्षियों को मानवीय बस्तियों के करीब ला दिया है।
3. हिमालयन मोनाल: एक परिचय
मोनाल केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान का प्रतीक है।
वैज्ञानिक श्रेणी: यह ‘फीसेंट’ परिवार के ‘लोफोफोरस’ (Lophophorus) जीनस का पक्षी है। इसकी कुल तीन प्रजातियां पाई जाती हैं।
विशेषता: नर मोनाल अपने सिर पर मोर जैसी कलगी और नीले, हरे, बैंगनी जैसे कई चमकदार रंगों के कारण दुनिया के सबसे खूबसूरत पक्षियों में गिना जाता है।
महत्व: यह उत्तराखंड का राज्य पक्षी है और उच्च हिमालयी जैव विविधता (Biodiversity) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
4. स्थानीय लोगों और पर्यटकों में खुशी
पंचाचूली की पहाड़ियों के बर्फ से लकदक होने और वहां मोनाल के दीदार होने से क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए यह किसी तोहफे से कम नहीं है क्योंकि मोनाल एक शर्मीला पक्षी है और अक्सर इतनी आसानी से दिखाई नहीं देता।
निष्कर्ष: दारमा घाटी में मोनाल का दिखना इस बात का प्रमाण है कि विषम परिस्थितियों के बावजूद हिमालय की जैव विविधता सुरक्षित है। स्थानीय प्रशासन और पर्यावरणविदों ने पर्यटकों से अपील की है कि वे इन दुर्लभ पक्षियों के प्राकृतिक आवास का सम्मान करें और उन्हें परेशान न करें।
